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हर्षित अपहरण कांड में एक युवती समेत पांच गिरफ्तार
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 02 Dec 2014 09:59 AM IST
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बीएसएनएल अधिकारी के बेटे हर्षित के अपहरण मामले में उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार से एक युवती समेत 5 अपहर्ताओं को गिरफ्तार किया है।
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अपहरण में प्रयुक्त दो कारों समेत चार वाहन बरामद
इनके पास से फिरौती में वसूले 34 लाख रुपए और अपहरण में प्रयुक्त दो कारों समेत चार वाहन मिले हैं। अपहरण की साजिश मुजफ्फरनगर के ठेकेदार, उसकी बेटी और बेटे ने रची थी।
यह भी खुलासा हुआ है कि इनका इरादा राज्य निर्माण निगम के इंजीनियर के बेटे का अपहरण करने का था, लेकिन गलती से हर्षित को उठाकर ले गए।
अपहर्ताओं को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने रविवार रात भर हरिद्वार में सर्च आपरेशन चलाया था। बसंत विहार थाना क्षेत्र के जीएमएस रोड स्थित इंजीनियर एंकलेव निवासी बीएसएनएल अधिकारी गिरिश तायल के बेटे हर्षित तायल (17) का बदमाशों ने शनिवार शाम अपहरण किया था। अपहर्ताओं से गुपचुप डील के बाद रविवार को हर्षित को छोड़ दिया गया।
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तोड़ा सिम और उड़ाया डाटा
हर्षित के अपहर्ता पुलिस की हर चाल से वाकिफ थे। यही वजह थी कि वह अपना हर कदम पूरी सतर्कता से उठा रहे थे। फर्जी आईडी पर सिम लेने के बाद फिरौती के लिए फोन करने के लिए वह अपनी लोकेशन बदलते रहे।
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पुलिस को गुमराह करने के लिए सहारनपुर जाकर कॉल की। फिरौती की रकम देने के लिए जब पिता ने हर्षित से बात कराने के लिए कहा तो बदमाशों ने उसकी आवाज टेपकर वीडियो को व्हाट्सएप से भेजा।
दूसरी बार बात कराने के लिए कहने पर अपहर्ताओं ने हर्षित को कांफ्रेंस पर ले लिया। पकड़े जाने से पहले बदमाशों ने अपहरण में प्रयुक्त दो सिम तोड़ने के साथ व्हाट्सएप पर भेजे गए संदेशों का डाटा उड़ा दिया। शायद वह नहीं जानते थे कि पुलिस डाटा रिकवर भी कर सकती है।
व्हाट्सएप पर चला शह और मात का खेल
हर्षित के अपहर्ताओं और पुलिस के बीच व्हाट्सएप पर घंटों शह और मात का खेल चला। जिस तरह पुलिस से लेकर उनके अधिकारी व्हाट्सएप पर जानकारियों का आदान प्रदान कर रहे थे उसी तरह अपहर्ताओं ने भी अपना ग्रुप बना रखा था।
पुलिस से बचने के लिए अपहर्ता अधिकतर बातों का आदान प्रदान व्हाट्सएप पर कर रहे थे। अपहर्ताओं के पकड़े जाने पर जुर्म में इस्तेमाल की गई इस तकनीक का खुलासा हुआ।
कई घंटे लावारिस रही फिरौती की रकम
अपहर्ताओं ने फिरौती की रकम का बैग फेंकने के लिए मोतीचूर को इसलिए चुना था कि जंगल का इलाका होने की वजह से यहां पर ट्रेन की स्पीड कम रहती है। यही वजह रही कि नोटों से भरा बैग यहां कई घंटे तक लावारिस पड़ा रहा। पुलिस भी दूर से नजर गड़ाए रही।
बाद में कार सवार दो बदमाश बैग उठाकर ले गए। रास्ते में पुलिस ने बदमाशों की कार को रोका, लेकिन औपचारिकता पूरी कर छोड़ दिया। दरअसल, पुलिस हर्षित की बरामदगी से पहले किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती थी।
सहमा हुआ था हर्षित
अपहर्ताओं के चुंगल से छूटकर आया 12वीं का छात्र हर्षित बेहद सहमा हुआ था। उसके चेहरे पर दहशत के भाव झलक रहे थे।
जिस समय पुलिस अपहरण से संबंधित बातचीत मीडिया से कर रही थी उस समय परिजन हर्षित को लेकर कार में ही बैठे रहे। उसे मीडिया के सामने नहीं लाया गया। पत्रकारों के सवालों पर वह उनकी तरफ टकटकी लगाए देखता लेकिन बोला कुछ नहीं।
तायल को फोन पर मिला हुक्म
हर्षित के पिता गिरिश तायल ने बताया कि अपहर्ताओं ने फोन पर ही लाल सूटकेस में रकम रखने के लिए कहा था। इसके बाद उन्होंने अपहर्ताओं से खुद को हार्ट रोगी बताते हुए एक साथी साथ लाने के लिए कहा, लेकिन बदमाशों ने इसकी अनुमति नहीं दी।
देहरादून से चलते समय तायल को अपहर्ता हर कदम पर फोन से बताते रहे कि उन्हें कब क्या करना है।फिल्मों से अपहरण की प्रेरणा
अपहरण में पकड़े गए ठेके दार संजय बालियान का कहना है कि आर्थिक तंगी के चलते उसने यह अपराध किया है। वह अपने बच्चों के साथ कुछ नहीं कर पा रहा था। उसने बताया कि उसे ऐसा करने की प्रेरणा फिल्मों से मिली। हालांकि किसी फिल्म का नाम नहीं बता पाया।