'जैसे उन चारों को मारा, तुम्हें भी मार देगी आत्मा'
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जय सिंह सहित चार परिजनों का कत्ल करने वाले हरमीत सिंह ने भूत-प्रेत की कहानी सुनाकर पुलिस को सकते में डाल दिया।
पूछताछ के दौरान आत्मा के सवाल पर हरमीत का जवाब था कि उसके आते ही उसकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। यदि आत्मा फिर आ गई तो उन सबको भी मार डालेगी।
हरमीत सिंह भले ही खुद को मानसिक रूप से बीमार दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसने हत्याकांड को पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दिया। उसने पड़ोसी की तरफ खुलने वाली खिड़की को बेड के गद्दे से ढक दिया था, ताकि किसी को कुछ पता न चल सके।
हरमीत सिंह के दिलो-दिमाग में भरा नफरत का गुबार दिवाली की रात पिता जय सिंह, सौतेली मां कुलवंत कौर, बहन हरजीत कौर और भांजी सुखमणि की हत्या के रूप में फूटा।
संपत्ति के हर हकदार को ठिकाने लगाने का था इरादा
एक तो नशा और दूसरा कम बात करने की आदत की वजह वह अपनी पीड़ा को कभी जाहिर नहीं कर पाया।
हत्याकांड की हर कड़ी को जोड़ा जाए तो पता चलता है कि यह सब सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। दिवाली से एक दिन पहले हरमीत ने जीजा अरविंदर सिंह को फोन कर घर बुलाया था, लेकिन वह नहीं पहुंचे।
हरमीत का इरादा संपत्ति के हर हकदार को ठिकाने लगाने का था। रामपुरी चाकू को धार लगाने और क्लोरोफार्म खरीदने की कोशिश, चार अपनों का खून बहाने के बाद जिंदा बचे एक मात्र चश्मदीद भांजे कंवलजीत सिंह को आतंकित कर नकाबपोश बदमाशों की कहानी भी साजिश की कहानी को पुख्ता करती है।
आदर्श नगर में हुए हत्याकांड के बाद आरोपी हरमीत सिंह आसानी से फरार हो सकता था, लेकिन पुलिस की सजगता ने उसे मौका नहीं मिल पाया।
पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
हाथों में खून देखकर चौकी प्रभारी ने हरमीत को बाहर दबोच लिया था। उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया।
हत्याकांड की सूचना मिलने पर बिंदाल पुलिस चौकी प्रभारी सुचात सिंह सबसे पहले मौके पर पहुंचे। घर के बाहर खड़े हरमीत सिंह के हाथ में पट्टी बंधी थी और उंगलियों एवं कपड़े पर खून लगा था। चौकी प्रभारी ने कारण पूछा तो हरमीत ने बताया कि कई दिन पहले चोट लग गई थी।
बोला कि यहां कुछ नहीं है, अंदर जाकर देखो क्या हुआ है। एक बार तो चौकी प्रभारी आगे बढ़ गए थे, लेकिन फिर हरमीत को एक सिपाही के हवाले कर गए। सिपाही ने हरमीत का हाथ पकड़ा था।
हरमीत ने खुद को सिपाही से छुड़ाने के लिए हाथापाई भी की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया। उस समय कुछ लोगों ने हरमीत को इस तरह पकड़ने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। लेकिन सिपाही ने हरमीत को वहां से हिलने नहीं दिया।