देखिए, कैसे अर्द्घकुंभ में पुलिस को ठग रही थी 'पुलिस'
हरिद्वार अर्द्धकुंभ पुलिस के तीन यातायात कांस्टेबल से 34 हजार ठग चुका फर्जी दारोगा हत्थे चढ़ गया। नटवरलाल ने खुद को पीटीसी मुरादाबाद में प्रशिक्षु दारोगा होना बताया था।
आरोपी को जब धरा तब वो पुलिस की वर्दी पहने हुए था और फर्जी आईकार्ड भी उसके कब्जे से बरामद हुआ। एक पीड़ित कांस्टेबल ने फर्जी दारोगा के खिलाफ रानीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है।
भगत सिंह चौक से सटे मैदान में अर्द्धकुंभ पुलिस की यातायात पुलिस लाइन है। दो फरवरी को यातायात पुलिस लाइन में तैनात कांस्टेबल पृथ्वीराज सिंह की मुलाकात दारोगा की वर्दी पहने नटवरलाल कमलेश प्रसाद से हुई।
खुद को वर्ष 2011 में कांस्टेबल के पद पर भर्ती होना बता रहे नटवरलाल ने बताया कि उसका चयन अब दारोगा के पद पर हुआ है और वो पीटीसी मुरादाबाद में प्रशिक्षण ले रहा है।
कांस्टेबल ने नटवरलाल पर विश्वास कर लिया
बकायदा वर्दी पहने होने के चलते कांस्टेबल ने नटवरलाल पर विश्वास कर लिया। आरोप है कि प्रशिक्षु दारोगा बता रहे नटवरलाल ने अपनी पत्नी का ऑपरेशन कराने के नाम पर कांस्टेबल पृथ्वीराज से चौदह, कांस्टेबल देवेंद्र व पंकज नेगी से दस-दस हजार की रकम ले ली। रकम लेकर चपत हो चुके नटवरलाल के संबंध में जब कांस्टेबलों ने जानकारी जुटाई तब वे हक्के बक्के रह गए।
पता चला कि इस नाम का कोई दारोगा पीटीसी मुरादाबाद में प्रशिक्षण नहीं ले रहा है। पुलिसकर्मियों ने कहीं भी कोई शिकायत नहीं की। मंगलवार को भगत सिंह चौक पर तैनात कांस्टेबल पृथ्वीराज ने नटवरलाल फर्जी दारोगा को धर दबोचा और अपने सहकर्मी देवेंद्र एवं पंकज नेगी की मदद से रानीपुर पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
जब नटवरलाल को दबोचा तब भी वो पुलिस की वर्दी में ही था। कोतवाली प्रभारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी मूल रुप से चमोली के पनीयाडा गैरसैंण का रहने वाला है। आरोपी के खिलाफ कांस्टेबल की ओर से संबधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।