रेलवे के पूर्व कर्मी को चार साल की कैद, 18 साल बाद सजा
- सीबीआई अदालत ने विभिन्न धाराओं में सुनाई सजा
- दोषी पर 16 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया
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सीबीआई अदालत ने हरिद्वार में रेलवे परिसर को व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल करने और नार्दर्न रेलवे इंप्लाइज कंज्यूमर सोसायटी के धन के दुरुपयोग का आरोप साबित होने पर रेलवे के पूर्व इलेक्ट्रिक फिटर को चार साल की कैद एवं 16 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। 18 साल बाद आए इस फैसले में अदालत ने कहा कि दोषी ने लोक सेवक होने के बावजूद नियम एवं कानूनों की कोई परवाह नहीं की।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक सीबीआई को तीन जून 1998 में सूचना मिली की हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर ट्रेन इलेक्ट्रिक फिटर ग्रुप सी के रूप में कार्यरत राम प्रकाश शर्मा निवासी श्यामपुर कांगड़ी जिला हरिद्वार ने हरिद्वार रेलवे मेन गेट के पास अवैध रूप से दुकानों का निर्माण कराया एवं खुद को लाभ पहुंचाने के लिए अपना व्यापार शुरू कर दिया।
अभियोजन ने कहा कि राम प्रकाश शर्मा उत्तर प्रदेश सरकार से सहायता प्राप्त नार्दन रेलवे कंज्यूमर कोआपरेटिव सोसायटी लिमिटेड हरिद्वार का सचिव भी है। इस सोसायटी का उद्देश्य राशन, कपड़ा, ग्रोसरी व अन्य सामान क्रय कर सोसायटी के सदस्यों को बेचना था, लेकिन आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपना व्यापार शुरू कर दिया।
औचक निरीक्षण में पकड़ा गया था पूर्व कर्मी
विशेष न्यायाधीश सीबीआई अनुज कुमार संगल की अदालत में हुई सुनवाई में लोक अभियोजक सतीश कुमार ने कहा कि सूचना पर सीबीआई ने औचक निरीक्षण किया तो देखने में आया कि राम प्रकाश शर्मा ने अपने पद का दुरुपयोग कर वहां पर गैर कानूनी रूप से एक रेस्टोरेंट, पान, सिगरेट, बीड़ी शाप, प्रसाद और राशन की दुकान चला रहे थे।
इससे प्राप्त होने वाली धनराशि को सोसायटी के एकाउंट में नहीं चढ़ाया जा रहा है। लोक अभियोजक सीबीआई सतीश कुमार ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन की ओर से 48 गवाह पेश किए गए। आरोप साबित होने पर अदालत ने दोषी को चार साल कैद और सोलह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने इन धाराओं में पाया दोषी
राम प्रकाश शर्मा को धारा 168 व 409 भादस एवं धारा 13 (1) (सी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत दोषी पाया है।
किन धाराओं में हुई कितनी सजा
-धारा 168 में छह माह का कारावास व 1000 अर्थदंड
-धारा 409 में चार साल का कारावास व10000 अर्थदंड
-भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में तीन साल की कैद एवं 5000 अर्थदंड
कब क्या हुआ
तीन जून 1998 को सीबीआई को शिकायत मिली
18 अगस्त 2004 को चार्जशीट दाखिल हुई
27 अक्तूबर 2005 व 14 अगस्त 2012 को आरोप तय हुआ