फर्जी एनकाउंटर में 17 पुलिसवालों को सजा
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सीबीआई ने इनके लिए फांसी की सजा मांगी थी। वहीं, बचाव पक्ष ने सजा में उदारता बरतने का आग्रह किया था।
तीस हजारी अदालत स्थित न्यायाधीश जेपीएस मलिक ने इस फर्जी एनकाउंटर के लिए शुक्रवार को हत्या, अपहरण, षड्यंत्र रचने के आरोप में 1 इंस्पेक्टर, 5 सब इंस्पेक्टर, 11 कांस्टेबल को दोषी ठहराया था।
इनमें से 7 को सीधे अपहरण व हत्या और 10 अन्य को हत्या के उद्देश्य से अपहरण व साजिश के आरोप में दोषी माना गया था। जबकि एक को सबूत मिटाने के लिए दोषी ठहराया गया था।
तिहाड़ जेल में बंद हैं दोषी पुलिसकर्मी
दिल्ली की तीस हजारी स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सोमवार को पेश हुए मामले के अनुसार, शालीमार गार्डन, गाजियाबाद निवासी रणवीर सिंह दोस्त के साथ 2 जुलाई 2009 को घूमने व नौकरी के लिए साक्षात्कार देने देहरादून आया था।
वहां कुछ पुलिस अधिकारियों से उसकी किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। 3 जुलाई 09 को उत्तराखंड पुलिस ने रणवीर को लुटेरा बताकर जंगल में एनकाउंटर में मार गिराया था।
सीबीआई जांच में एनकाउंटर फर्जी होने की पुष्टि हुई थी जिसके बाद 18 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। सभी पुलिसकर्मी तब से तिहाड़ जेल में बंद थे।
इन पुलिसकर्मियों को सुनाई गई सजा
पांच साल पुराने मामले में शुक्रवार को अदालत ने सभी 18 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया था।
कंट्रोल रूम के तत्कालीन हेड ऑपरेटर जसपाल सिंह गुसाईं को साक्ष्य से छेड़छाड़ का दोषी पाया गया था। कोर्ट ने जसपाल को 50 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दे दिया था।
ये हैं दोषी पुलिसकर्मी
इंस्पेक्टर संतोष कुमार जायसवाल, सब इंस्पेक्टर जीडी भट्ट, सब इंस्पेक्टर नितिन चौहान, सब इंस्पेक्टर राजेश बिष्ट, सब इंस्पेक्टर नीरज यादव, सब इंस्पेक्टर चंद्रमोहन सिंह, कांस्टेबल अजीत सिंह, सौरभ नौटियाल, विकास बलूनी, सतवीर सिंह, चंद्रपाल, सुनील सैनी, नागेंद्र राठी, संजय रावत, इंद्र भान सिंह, मोहन सिंह राणा, मनोज कुमार।