लोन फर्जीवाड़ा: सीनियर मैनेजर समेत 11 को सीबीआई कोर्ट से सजा
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लोन फर्जीवाड़े में सीबीआई कोर्ट ने बैंक आफ बड़ौदा हल्द्वानी के सीनियर मैनेजर समेत 11 लोगों को सजा सुनाई है। जबकि दो अन्य पर दोष साबित हुआ है।
मामला बैंक आफ बड़ौदा की हल्द्वानी शाखा में वर्ष 2006 का है। बैंक अधिकारियों ने हाउसिंग लोन के रूप में 1.11 करोड़ रुपये बांटे थे। आरोप है कि लोन बांटने में बैंक के सीनियर मैनेजर एनसी आर्य और आवेदकों ने मिलीभगत कर फर्जीवाड़ा किया। आडिट में गड़बड़ी पकड़ में आई। जून 2009 में मामला सीबीआई के पास पहुंचा।
पांच जून 2009 में सीबीआई ने मामले में 35 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सीबीआई ने अदालत में अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की। मामले की सुनवाई सीबीआई की विशेष अदालत में चली। 15 अभियुक्तों को वर्ष 2015 में सजा हो चुकी है। जबकि छह अन्य लोग पहले ही अपना जुर्म स्वीकार कर चुके हैं।
13 अभियुक्तों पर साबित हुआ जुर्म
14 आरोपियों पर अदालत में सुनवाई चल रही थी। इनमें मंगलवार को 13 अभियुक्तों पर जुर्म साबित हुआ। इसमें दो अभियुक्त कमला रावत और कमलेश रावत मंगलवार को अदालत में अनुपस्थित रहे।
अदालत ने मंगलवार को बैंक के सीनियर मैनेजर एनसी आर्य और रितेश दोनों निवासी हल्द्वानी को चार-चार साल की सजा सुनाई गई है। जबकि शशि प्रभा, किशन सिंह बोरा, मोहन सिंह बिष्ट, दीपक मुखर्जी, संतोष गोस्वामी, सुनीता गोस्वामी, निर्मला जोशी, सुनीता रानी सभी निवासी हल्द्वानी और गणेश सिंह गौड़ निवासी मुक्तेश्वर, नैनीताल को दो-दो साल की सजा सुनाई है। जबकि लोन का मूल्यांकन करने वाले संजीव वर्मा को अदालत ने बरी कर दिया।