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राज्य में बढ़ रहे नाबालिगों से यौन अपराध के मामले
Updated Fri, 24 Aug 2018 02:24 AM IST
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राज्य में बढ़ रहे नाबालिगों से यौन अपराध के मामले
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य में नाबालिगों के प्रति यौन अपराधों में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है। बीते तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज हुए मामलों में हर साल 20 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। इनमें ज्यादातर मामलों में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर मुकदमों की पैरवी की है। लगभग 400 दोषियों को इस एक्ट के तहत सजा हो चुकी है।
साल 2012 में पोटेक्शन ऑफ चिड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पॉक्सो) एक्ट अस्तित्व में आया था। यह एक्ट बच्चों को यौन अपराधों और पोर्नोग्रॉफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। एक्ट के अस्तित्व में आने के बाद बच्चों पर होने वाले लैंगिक अपराधों को इसी के तहत दर्ज किया जाता है। राज्य में भी नाबालिगों पर यौन अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2015, 2016 व 2017 में प्रदेश में 1013 मुकदमे पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किए गए थे। इनमें 1028 पीड़ित हैं। पुलिस ने इनमें से 904 मुकदमों में आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। जबकि 80 मामलों में फाइनल रिपोर्ट और 22 में चालानी रिपोर्ट भेजी है। अब तक आठ मामलों की जांच लंबित है।
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जून तक 210 मामले
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इस साल जून तक 210 मुकदमे पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं। इनमें से 180 मुकदमों में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। बाकी मुकदमों में पुलिस की विवेचना चल रही है।
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दून में हुई 50 लोगों को सजा, फांसी का पहला मामला
पॉक्सो कोर्ट ने इस साल 50 लोगों को विभिन्न मामलों में सजा सुनाई है। इनमें बृहस्पतिवार को आया फांसी का मामला देहरादून पॉक्सो कोर्ट द्वारा सुनाया गया पहला सजा ए मौत का फैसला है। शासकीय अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि इस साल अब तक 10 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं, 20 लोग ऐसे हैं जिन्हें 10 वर्ष तक की सजा हुई है।
नाबालिगों के प्रति अपराध गंभीर श्रेणी के अपराध होते हैं। इनमें यौन अपराधों में पुलिस गंभीरता से जांच करती है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार मजबूत से मजबूत पैरवी करती है। यही कारण है कि ज्यादातर मामलों में पुलिस आरोपियों को सजा दिलाने में कामयाब होती है।
- अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, कानून व्यवस्था
मुकदमे एक नजर में
साल मुकदमे पीड़ित र्चाशीट फाइनल रिपोर्ट
2015 257 257 235 18
2016 318 322 283 29
2017 438 449 386 33
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य में नाबालिगों के प्रति यौन अपराधों में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है। बीते तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज हुए मामलों में हर साल 20 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। इनमें ज्यादातर मामलों में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर मुकदमों की पैरवी की है। लगभग 400 दोषियों को इस एक्ट के तहत सजा हो चुकी है।
साल 2012 में पोटेक्शन ऑफ चिड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पॉक्सो) एक्ट अस्तित्व में आया था। यह एक्ट बच्चों को यौन अपराधों और पोर्नोग्रॉफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। एक्ट के अस्तित्व में आने के बाद बच्चों पर होने वाले लैंगिक अपराधों को इसी के तहत दर्ज किया जाता है। राज्य में भी नाबालिगों पर यौन अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2015, 2016 व 2017 में प्रदेश में 1013 मुकदमे पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किए गए थे। इनमें 1028 पीड़ित हैं। पुलिस ने इनमें से 904 मुकदमों में आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। जबकि 80 मामलों में फाइनल रिपोर्ट और 22 में चालानी रिपोर्ट भेजी है। अब तक आठ मामलों की जांच लंबित है।
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जून तक 210 मामले
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इस साल जून तक 210 मुकदमे पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं। इनमें से 180 मुकदमों में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। बाकी मुकदमों में पुलिस की विवेचना चल रही है।
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दून में हुई 50 लोगों को सजा, फांसी का पहला मामला
पॉक्सो कोर्ट ने इस साल 50 लोगों को विभिन्न मामलों में सजा सुनाई है। इनमें बृहस्पतिवार को आया फांसी का मामला देहरादून पॉक्सो कोर्ट द्वारा सुनाया गया पहला सजा ए मौत का फैसला है। शासकीय अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि इस साल अब तक 10 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं, 20 लोग ऐसे हैं जिन्हें 10 वर्ष तक की सजा हुई है।
नाबालिगों के प्रति अपराध गंभीर श्रेणी के अपराध होते हैं। इनमें यौन अपराधों में पुलिस गंभीरता से जांच करती है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार मजबूत से मजबूत पैरवी करती है। यही कारण है कि ज्यादातर मामलों में पुलिस आरोपियों को सजा दिलाने में कामयाब होती है।
- अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, कानून व्यवस्था
मुकदमे एक नजर में
साल मुकदमे पीड़ित र्चाशीट फाइनल रिपोर्ट
2015 257 257 235 18
2016 318 322 283 29
2017 438 449 386 33