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व्यावसायिक प्रशिक्षण के नाम पर लाखों का गोलमाल
Updated Sun, 24 Dec 2017 01:33 AM IST
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व्यावसायिक प्रशिक्षण के नाम पर लाखों का गोलमाल
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (आईएलएसपी) के तहत व्यावसायिक प्रशिक्षण (वोकेशनल ट्रेनिंग) के नाम पर लाखों रुपये के गोलमाल का मामला सामने आया है। प्रशिक्षण देने वाली एजेंसियों के पास प्रशिक्षणार्थियों का रिकार्ड तक नहीं है। अब सरकार ने ऐसी सात एजेंसियों को नोटिस जारी कर 26 दिसंबर तक जवाब मांगा है। सही जवाब नहीं देने पर इन एजेंसियों को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा, साथ ही एफआईआर दर्ज होगी।
उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति के माध्यम से आईएलएसपी के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में पर्वतीय क्षेत्र के युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण देने के लिए प्रदेश में 22 एजेंसियों का चयन किया गया था। आरोप है कि सात एजेंसियों ने प्रशिक्षण के नाम पर लाखों रुपये का गोलमाल किया है। इन एजेंसियों को 2016 में प्रशिक्षण के लिए दो किस्तों में 15 लाख रुपये जारी किए गए थे। लेकिन एजेंसियों ने प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं का सत्यापन तक नहीं किया, न ही उनकी बायोमीट्रिक हाजिरी ली। इससे साफ है कि एजेंसियों ने पैसा तो लिया, लेकिन युवाओं को प्रशिक्षण नहीं दिया। वहीं, परियोजना की ओर से बार-बार पत्र भेजने के बाद भी एजेंसियों ने कोई जवाब नहीं दिया। अब ऐसी एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए अंतिम नोटिस जारी किया गया है।
इन एजेंसियों को नोटिस
वेप टेक्नोलॉजी, मास इंफोटेक, माउंट टेेलेंट, नेशनल पैरामेडिकल, सरस्थ फाउंडेशन, एसजीआरएस, त्रिहत समाग्र विकास परिषद को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। व्यावसायिक प्रशिक्षण देने पर एजेंसियों को 30 रुपये प्रति घंटा प्रति प्रशिक्षणार्थी के हिसाब से भुगतान किया जाता है। इसमें एजेंसियों के साथ समझौते में यह भी शर्त है कि प्रशिक्षण देने के बाद युवाओं का प्लेसमेंट देना है।
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व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए ये हैं शर्तें
-परियोजना के तहत गठित उत्पादक, निर्बल उत्पादक समूह, आजीविका संगठन से जुड़े युवाओं को प्रशिक्षण।
- प्रशिक्षण के लिए चयनित युवाओं को प्रशिक्षण अवधि में स्वास्थ्य व दुर्घटना बीमा की सुविधा।
- ट्रेनिंग के दौरान युवाओं को कौशल विकास व सूचना प्रौद्योगिकी का ज्ञान देना।
- बायोमीट्रिक तरीके से प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य।
- प्रशिक्षण हासिल करने के बाद युवाओं का प्लेसमेंट कराना।
आजीविका सहयोग परियोजना में व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चयनित सात एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई शुरू की गई है। इन एजेंसियों को ट्रेनिंग शुरू करने के लिए दो किस्त जारी की गई थी, लेकिन इसके बाद प्रशिक्षण देने से संबंधित कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
राम बिलास यादव, अपर सचिव एवं परियोजना निदेशक
प्रदेश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की स्थिति
- परियोजना के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त युवा- 4834
- ट्रेनिंग के लिए सत्यापित युवा- 2572
- प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट का ऑफर- 1375
- विभिन्न कंपनियों में 1143 युवाओं को मिली नौकरी
- प्रशिक्षण लेकर 211 युवाओं ने शुरू किया स्वरोजगार
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (आईएलएसपी) के तहत व्यावसायिक प्रशिक्षण (वोकेशनल ट्रेनिंग) के नाम पर लाखों रुपये के गोलमाल का मामला सामने आया है। प्रशिक्षण देने वाली एजेंसियों के पास प्रशिक्षणार्थियों का रिकार्ड तक नहीं है। अब सरकार ने ऐसी सात एजेंसियों को नोटिस जारी कर 26 दिसंबर तक जवाब मांगा है। सही जवाब नहीं देने पर इन एजेंसियों को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा, साथ ही एफआईआर दर्ज होगी।
उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति के माध्यम से आईएलएसपी के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में पर्वतीय क्षेत्र के युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण देने के लिए प्रदेश में 22 एजेंसियों का चयन किया गया था। आरोप है कि सात एजेंसियों ने प्रशिक्षण के नाम पर लाखों रुपये का गोलमाल किया है। इन एजेंसियों को 2016 में प्रशिक्षण के लिए दो किस्तों में 15 लाख रुपये जारी किए गए थे। लेकिन एजेंसियों ने प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं का सत्यापन तक नहीं किया, न ही उनकी बायोमीट्रिक हाजिरी ली। इससे साफ है कि एजेंसियों ने पैसा तो लिया, लेकिन युवाओं को प्रशिक्षण नहीं दिया। वहीं, परियोजना की ओर से बार-बार पत्र भेजने के बाद भी एजेंसियों ने कोई जवाब नहीं दिया। अब ऐसी एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए अंतिम नोटिस जारी किया गया है।
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इन एजेंसियों को नोटिस
वेप टेक्नोलॉजी, मास इंफोटेक, माउंट टेेलेंट, नेशनल पैरामेडिकल, सरस्थ फाउंडेशन, एसजीआरएस, त्रिहत समाग्र विकास परिषद को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। व्यावसायिक प्रशिक्षण देने पर एजेंसियों को 30 रुपये प्रति घंटा प्रति प्रशिक्षणार्थी के हिसाब से भुगतान किया जाता है। इसमें एजेंसियों के साथ समझौते में यह भी शर्त है कि प्रशिक्षण देने के बाद युवाओं का प्लेसमेंट देना है।
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व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए ये हैं शर्तें
-परियोजना के तहत गठित उत्पादक, निर्बल उत्पादक समूह, आजीविका संगठन से जुड़े युवाओं को प्रशिक्षण।
- प्रशिक्षण के लिए चयनित युवाओं को प्रशिक्षण अवधि में स्वास्थ्य व दुर्घटना बीमा की सुविधा।
- ट्रेनिंग के दौरान युवाओं को कौशल विकास व सूचना प्रौद्योगिकी का ज्ञान देना।
- बायोमीट्रिक तरीके से प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य।
- प्रशिक्षण हासिल करने के बाद युवाओं का प्लेसमेंट कराना।
आजीविका सहयोग परियोजना में व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चयनित सात एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई शुरू की गई है। इन एजेंसियों को ट्रेनिंग शुरू करने के लिए दो किस्त जारी की गई थी, लेकिन इसके बाद प्रशिक्षण देने से संबंधित कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
राम बिलास यादव, अपर सचिव एवं परियोजना निदेशक
प्रदेश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की स्थिति
- परियोजना के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त युवा- 4834
- ट्रेनिंग के लिए सत्यापित युवा- 2572
- प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट का ऑफर- 1375
- विभिन्न कंपनियों में 1143 युवाओं को मिली नौकरी
- प्रशिक्षण लेकर 211 युवाओं ने शुरू किया स्वरोजगार