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सीबीसीआईडी जांच के नियम और होंगे कड़े
Updated Thu, 14 Dec 2017 01:49 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
सिविल पुलिस से जांच लेकर सीबीसीआईडी को सौंपने के नियम अब और सख्त होंगे। संगीन अपराध को छोड़कर पार्टी बंदी की लड़ाई, छोटे घोटालों और बीस लाख से कम की धोखाधड़ी में सीबीसीआईडी जांच कराने के दबाव को लेकर शासन बेहद चिंतित है। इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय को सीबीसीआईडी जांच के नए मानक तय करने के निर्देश दिए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने अधिकारियों के साथ बैठक कर नए नियम बनाने को दस दिन का वक्त तय किया।
सीबीसीआईडी जांच सुपुर्द करने के मामले में 2013 में मानक तय हुए थे, मगर सरकार उसकी अनदेखी करती रही। गांवों में पार्टी बंदी में हुए झगड़ों की जांच तक सीबीसीआईडी के पास पहुंचा दी गई। कई हत्याएं की विवेचनाएं तो एक से डेढ़ साल बाद सुपुर्द हुई, तब तक तमाम साक्ष्य मिटाए जा चुके थे। छोटी धोखाधड़ी तक की विवेचना सीबीसीआईडी के खाते में डाली गई। नतीजा यह है कि संगीन अपराध के बजाए पार्टी बंदी के बलवों, छोटे फ्राड, धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग, फोन पर धमकी जैसे मामलों की जांच भी सीबीसीआईडी से कराने की मांग उठ रही है। अपनी मांग पूरी कराने के लिए शासन पर इधर-उधर से दबाव भी बनाए जा रहे हैं।
शासन ने इसी कड़ी में सिविल पुलिस से विवेचना लेकर सीबीसीआईडी को सौंपने के नियम और सख्त बनाने के निर्देश दिए, ताकि संगीन अपराध या बडे़ मामलों की विवेचना ही सीबीसीआईडी को सौंपी जा सके। अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने मुख्यालय और सीबीसीआईडी के अधिकारियों के साथ नए मानकों को लेकर चर्चा की। अधिकारियों का कहना था कि संगीन अपराधों की विवेचना भी अधिक से अधिक तीन माह की अवधि में सुपुर्द की जाए, ताकि साक्ष्यों के संकलन में किसी तरह की देरी न होेने पाए। बैठक में दस दिन में नियम तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरा ड्राफ्ट तैयार कर स्वीकृति को शासन को भेजा जाएगा। आईजी कानून व्यवस्था दीपम सेठ, डीआईजी सीबीसीआईडी अनंत कुमार चौहान, एएसपी सीबीसीआईडी श्वेता चौबे आदि बैठक में मौजूद रहे।
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सिविल पुलिस से जांच लेकर सीबीसीआईडी को सौंपने के नियम अब और सख्त होंगे। संगीन अपराध को छोड़कर पार्टी बंदी की लड़ाई, छोटे घोटालों और बीस लाख से कम की धोखाधड़ी में सीबीसीआईडी जांच कराने के दबाव को लेकर शासन बेहद चिंतित है। इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय को सीबीसीआईडी जांच के नए मानक तय करने के निर्देश दिए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने अधिकारियों के साथ बैठक कर नए नियम बनाने को दस दिन का वक्त तय किया।
सीबीसीआईडी जांच सुपुर्द करने के मामले में 2013 में मानक तय हुए थे, मगर सरकार उसकी अनदेखी करती रही। गांवों में पार्टी बंदी में हुए झगड़ों की जांच तक सीबीसीआईडी के पास पहुंचा दी गई। कई हत्याएं की विवेचनाएं तो एक से डेढ़ साल बाद सुपुर्द हुई, तब तक तमाम साक्ष्य मिटाए जा चुके थे। छोटी धोखाधड़ी तक की विवेचना सीबीसीआईडी के खाते में डाली गई। नतीजा यह है कि संगीन अपराध के बजाए पार्टी बंदी के बलवों, छोटे फ्राड, धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग, फोन पर धमकी जैसे मामलों की जांच भी सीबीसीआईडी से कराने की मांग उठ रही है। अपनी मांग पूरी कराने के लिए शासन पर इधर-उधर से दबाव भी बनाए जा रहे हैं।
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शासन ने इसी कड़ी में सिविल पुलिस से विवेचना लेकर सीबीसीआईडी को सौंपने के नियम और सख्त बनाने के निर्देश दिए, ताकि संगीन अपराध या बडे़ मामलों की विवेचना ही सीबीसीआईडी को सौंपी जा सके। अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने मुख्यालय और सीबीसीआईडी के अधिकारियों के साथ नए मानकों को लेकर चर्चा की। अधिकारियों का कहना था कि संगीन अपराधों की विवेचना भी अधिक से अधिक तीन माह की अवधि में सुपुर्द की जाए, ताकि साक्ष्यों के संकलन में किसी तरह की देरी न होेने पाए। बैठक में दस दिन में नियम तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरा ड्राफ्ट तैयार कर स्वीकृति को शासन को भेजा जाएगा। आईजी कानून व्यवस्था दीपम सेठ, डीआईजी सीबीसीआईडी अनंत कुमार चौहान, एएसपी सीबीसीआईडी श्वेता चौबे आदि बैठक में मौजूद रहे।
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