2009 बलवा प्रकरण: भाजपा नेता हरक सिंह रावत, सतपाल ब्रह्मचारी समेत चार पर आरोप तय
विधानसभा घेराव के वक्त बलवा और पुलिस के साथ झड़प के आरोपी कैबिनेट हरक सिंह रावत, कांग्रेस नेता सतपाल ब्रह्मचारी, विनोद रावत व शंकर चंद रमोला पर भी सीजेएम विवेक श्रीवास्तव की अदालत में आरोप तय हो गए। इस मुकदमे में कुल 25 नेता नामजद हैं, जिनमें से कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य समेत 21 पर पहले ही आरोप तय हो चुके हैं।
बृहस्पतिवार को मंत्री हरक सिंह रावत समेत ये तीनों नेता गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद अदालत में पेश हुए थे। जबकि दीप बोरा और लालचंद शर्मा नियमित सुनवाई के दौरान बृहस्पतिवार को अदालत में प्रस्तुत हुए। इस मामले में सभी 25 आरोपियों पर तीन तिथियों में आरोप तय हुए हैं। हरक सिंह रावत की ओर से अधिवक्ता दीपक गुप्ता ने पैरवी की।
ये आरोप हुए तय
आईपीसी 147 (बलवा करना), आईपीसी 149 (विधि विरुद्ध जमाव), आईपीसी 332 (लोकसेवक के साथ मारपीट), आईपीसी 353 (सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाना), आईपीसी 336 (दूसरों के जीवन को खतरा पहुंचाने का कार्य करना) और आईपीसी 504 (गाली गलौच करना)।
कब कब हुए चार्ज फ्रेम
29 अक्तूबर 2018
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य (तत्कालीन कांग्रेस नेता), राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, विधायक कुंवर प्रणव सिंह, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना, संग्राम सिंह पुंडीर, भूपेंद्र उर्फ बिल्लू, महेश शर्मा, विजय सिंह चौहान, मनीष नागपाल, विवेक खंडूरी, शिवेश बहुगुणा, टिंकल अरोड़ा, विकास चौधरी, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्ममचारी और राव असफाक।
मई 2019
किशोर उपाध्याय
27 जून 2019
हरक सिंह रावत, सतपाल ब्रह्मचारी, विनोद रावत और शंकर चंद रमोला।
ये है मामला
21 दिसंबर को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत ने अपने समर्थकों के साथ विधानसभा का घेराव के लिए कूच किया था। इस दौरान रिस्पना पुल पर उन्हें पुलिस बैरिकेडिंग लगाकर रोका गया, जहां उनका पुलिसकर्मियों के साथ विवाद हो गया। आरोप है कि इस नेताओं ने पुलिस के साथ धक्का मुक्की और मारपीट भी हो गई। इसके बाद पुलिस ने हरक सिंह रावत समेत 25 नेताओं को मुकदमे में नामजद किया था।
दो बार मुकदमा वापसी की अर्जी खारिज
इस मुकदमे को वापस लेने के लिए सरकार दो बार अर्जी लगा चुकी है। एक बार हरीश रावत सरकार ने अर्जी लगाई थी, जबकि इस साल भाजपा सरकार ने इसे लोक हित में हुए प्रदर्शन को बताकर वापस लेने की मांग की थी। हालांकि, दोनों ही बार न्यायालय ने इसे लोकहित की श्रेणी से बाहर रखा और सरकार की अर्जी ठुकरा दी।