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Dehradun News: देहरादून के सभी छह विकासखंडों में बनेंगे गो-आश्रय स्थल
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दून के सभी छह विकासखंडों में गो-आश्रय स्थलों का निर्माण होगा। इसके लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है। वहीं निर्माण कार्य के लिए इस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी की जा रही है। गो-आश्रय स्थलों का निर्माण होने फसलों को भी नुकसान नहीं होगा। साथ ही निराश्रित पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाएं भी नहीं होंगी।
दरअसल, दून में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एक ओर आवारा पशुओं से जहां फसल बर्बाद होने से किसानों को भारी क्षति उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर निराश्रित पशुओं के सड़कों पर घूमने के कारण दुर्घटनाएं हो जाती हैं। लोग निराश्रित पशुओं की समस्या को लेकर जिलाधिकारी के दरबार तक पहुंच रहे हैं।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के सभी छह विकासखंडों में गो-आश्रय स्थल बनाने के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है। वहीं अब इन गो-आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए इंजीनियरों से इस्टीमेट तैयार कराए जा रहे हैं। हालांकि अधिकांश गो-आश्रय स्थलों का इस्टीमेट तैयार हो चुका है।
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जिले में पहले से ही सात गो-आश्रय स्थल संचालित
पशुपालन विभाग के मुताबिक, जिले में पहले से सात गो-आश्रय स्थलों का संचालन किया जा रहा है। वहीं मौजूदा समय में करीब 1150 पशुओं को गो-आश्रय स्थलों रखा गया है। इसके अलावा गोवंशों के भरण-पोषण व देखभाल के लिए प्रति पशु हर दिन 80 रुपये की राशि शासन की ओर से दी जा रही है।
सभी विकासखंड में गो-आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध हो गई है। जल्द इनमें निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। निराश्रित पशुओं के लेकर आने वाले दिनों में कोई समस्या नही रहेगी। -विद्यासागर कापड़ी, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, देहरादून
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दरअसल, दून में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एक ओर आवारा पशुओं से जहां फसल बर्बाद होने से किसानों को भारी क्षति उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर निराश्रित पशुओं के सड़कों पर घूमने के कारण दुर्घटनाएं हो जाती हैं। लोग निराश्रित पशुओं की समस्या को लेकर जिलाधिकारी के दरबार तक पहुंच रहे हैं।
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पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के सभी छह विकासखंडों में गो-आश्रय स्थल बनाने के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है। वहीं अब इन गो-आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए इंजीनियरों से इस्टीमेट तैयार कराए जा रहे हैं। हालांकि अधिकांश गो-आश्रय स्थलों का इस्टीमेट तैयार हो चुका है।
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जिले में पहले से ही सात गो-आश्रय स्थल संचालित
पशुपालन विभाग के मुताबिक, जिले में पहले से सात गो-आश्रय स्थलों का संचालन किया जा रहा है। वहीं मौजूदा समय में करीब 1150 पशुओं को गो-आश्रय स्थलों रखा गया है। इसके अलावा गोवंशों के भरण-पोषण व देखभाल के लिए प्रति पशु हर दिन 80 रुपये की राशि शासन की ओर से दी जा रही है।
सभी विकासखंड में गो-आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध हो गई है। जल्द इनमें निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। निराश्रित पशुओं के लेकर आने वाले दिनों में कोई समस्या नही रहेगी। -विद्यासागर कापड़ी, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, देहरादून