कोर्ट ने दिए महंत रामानंद पुरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश, लगा फर्जीवाड़े का आरोप
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हरिद्वार में पंजाब नेशनल बैंक में बंधक रखी हुई संपत्ति को बेचने के मामले में महंत रामानंद पुरी चेला गुरु निरंजन देव के खिलाफ कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
अधिवक्ता परमेश्वर राठौड़ ने बताया कि महंत रामानंद पुरी निवासी निरंजनी अखाड़ा मायापुर हरिद्वार ने एक आवासीय फ्लैट नंबर 165 स्थित तृतीय तल एमआईजी श्रेणी पॉकेट 23 सेक्टर 24 रोहिणी में स्थित प्लाट के लिए पंजाब नेशनल बैंक से ऋण लेने के लिए 27 फरवरी 2012 को आवेदन किया था।
बैंक ने महंत रामानंद पुरी के आवेदन पर उसे 37 लाख 50 हजार रुपये का ऋण फ्लैट खरीदने के लिए दिया था। महंत रामानंद पुरी ने शपथपत्र भी बैंक को दिया था कि वह ऋण अदा करने तक फ्लैट को किसी को विक्रय नहीं करेगा।
उसके बावजूद भी महंत रामानंद पुरी ने बैंक में बंधक रखी गई संपत्ति को फरवरी 4 फरवरी 2013 को निर्मला पत्नी राजवीर सिंह निवासी बहादुरगढ़ हरियाणा को विक्रय कर दिया था।
बैंक की ओर से रामानंद पुरी पर आरोप लगाया गया की उन्होंने बैंक से लिए गए ऋण की बकाया धनराशि 34 लाख 57 हजार 687 रुपये व ब्याज हड़पने की गरज से धोखाधड़ी करते हुए बैंक में बंधक रखी संपत्ति को बिना बताए बिना बैंक की सहमति के विक्रय कर दिया है।
बैंक ने महंत रामानंद पुरी निवासी निरंजनी अखाड़ा मायापुर हरिद्वार और निर्मला पत्नी राजवीर निवासी बहादुरगढ़ हरियाणा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए कोतवाली ज्वालापुर में प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया।
कोई कार्यवाही ना होने पर बैंक ने मुख्य प्रबंधक के द्वारा धारा 156 -3 के अंतर्गत न्यायालय मैं प्रार्थना पत्र दिया और मुकदमा दर्ज कराने की गुहार लगाई। प्रार्थना पर सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम कंचन चौधरी ने थानाध्यक्ष ज्वालापुर को मुकदमा दर्ज विवेचना कर न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए।