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शिक्षा मंत्री को राहत, कोर्ट में याचिका स्वीकार
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 12 Nov 2014 11:21 AM IST
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने इस फैसले के खिलाफ जिला सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की है।
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निस्तारण पर सुनवाई के आदेश
जिसे स्वीकारते हुए न्यायालय ने निचली अदालत को अभियोजन के मुकदमे वापसी के पत्र के निस्तारण पर सुनवाई के आदेश दिए हैं।
आत्म दाह के मामले में आरोपी शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के खिलाफ निचली अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी था, निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ मंत्री ने जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की थी।
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जिला सत्र न्यायालय में दाखिल याचिका में मंत्री ने कहा कि सीजेएम कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए पत्रावली पर उपलब्ध तथ्य का ठीक से अवलोकन नहीं किया। निचली अदालत ने इस तथ्य को नजरअंदाज किया कि प्रशासन ने फौजदारी वाद वापस लेने की संस्तुति की है।
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शासन की ओर से भी 19 अक्तूबर वर्ष 2013 को शासन ने वाद वापसी का आदेश दिया था। जिसे अदालत ने नजरअंदाज किया है। मंत्री ने याचिका में कहा कि जिला सत्र न्यायालय पत्रावली को तलब करते हुए निचली अदालत के आदेश को निरस्त करे।
वही उनके खिलाफ वाद को वापस लिया जाए। बीते दिनो मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच बहस के बाद जिला सत्र न्यायालय ने याचिका स्वीकार कर अपना फैसला सुनाया।
यह है प्रकरण
प्रकरण आत्महत्या के प्रयास से जुड़ा है, 24 अप्रैल वर्ष 2000 में उत्तराखंड बेरोजगार महासंघ के अध्यक्ष कमल रतूड़ी व वर्तमान में शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने प्रशिक्षित बेरोजगारों को रोजगार दिए जाने की मांग को लेकर शहीद स्थल के पास खुद पर मिट्टी तेल छिड़ककर आत्महत्या का प्रयास किया था।
मामले में वाद दायर होने के बाद शिक्षा मंत्री कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। जिनके खिलाफ अदालत ने पहले बेलेबल फिर नॉन बेलेबल वारंट जारी किया था। कोर्ट से मंत्री के खिलाफ कुर्की के आदेश भी जारी किए गए थे।