देहरादून: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दंपति की याचिका याचिका, पहली बार किसी आरोपी को हुई जेल
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आय से अधिक संपत्ति मामले में आरोपी दंपति की जमानत याचिका को जिला जज की अदालत ने खारिज कर जेल भेज दिया। उत्तराखंड राज्य में मनी लॉन्ड्रिंग का यह पहला मामला है, जिसमें आरोपियों को जेल भेजा गया। बुधवार को दोनों आरोपियों ने जिला जज के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
नेहरू कालोनी निवासी नेशनल प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनपीसीसी) के महाप्रबंधक सतीश कुमार शर्मा व पत्नी रमोला शर्मा के खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के दो मामले दर्ज किए थे।
सीबीआई की जांच के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वर्ष 2016 में दोनों आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। आरोपियों से एक करोड़ 3 लाख रुपये की संपत्ति बरामद की गई।
जिसमें सोने के बिस्कुट, नकदी शामिल थी। मामले की जांच करने के बाद ईडी ने चार महीने पहले जिला न्यायालय में चार्जशीट दायर की। इस मामले में अदालत ने कई बार आरोपियों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत होने के समन जारी किए।
लेकिन आरोपी सतीश कुमार व रमोला शर्मा कार्रवाई से बचने का प्रयास करते रहे। बुधवार को दोनों ने जिला जज की अदालत में आत्मसमर्पण किया। अदालत ने दोनों को जेल भेज दिया। बृहस्पतिवार को जिला जज एनएस धानिक की अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए खारिज कर दी।
ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता विभोर गोयल ने मनी लॉन्ड्रिंग केस की पैरवी की। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य में मनी लॉन्ड्रिंग का यह पहला मामला है। जिसमें आरोपियों को जेल भेज गया है। आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के दो केस दर्ज किए हैं। इसमें एक केस में आरोपियों को सजा हो चुकी है। जबकि एक अन्य केस कोर्ट में विचाराधीन है।