दंपति का शिव से ऐसा संकल्प, ताकि जिंदा रहे पांचवा बेटा, जानिए
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ऐसे चमत्कार आपने सिर्फ कहानियो में ही सुने होंगे, लेकिन यह सौ फीसदी सच है। चार बच्चों की मौत होने के बाद दंपति का संकल्प अपने इस पांचवें बेटे को जिंदा रखे है। पढ़ें, पूरी खबर...
एक के बाद एक चार स्वस्थ बच्चों में से एक का भी सुख नहीं मिलने पर टूट चुके दंपति ने भोले के भरोसे संतान सुख पाने की आस छोड़ दी। माता-पिता के ताउम्र कांवड़ चढ़ाने के संकल्प लेते ही न केवल पांचवां बालक अभी तक जिंदा है, बल्कि इस बार दूसरे वर्ष नन्हा कांवड़िया भगवान शिव को जलाभिषेक करने भी आया है।
शिव शंकर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र यूं ही नहीं है। इसके पीछे कई कारण हैं। मेले में अगर आप ये कारण ढूंढने निकलेंगे तो इसकी अनगिनत वजह मिल जाएगी। ऐसा ही एक व्यक्ति में भगवान शिव में अटूट आस्था देखने को मिली। कांवड़ पटरी मार्ग पर शामली का नन्हा प्रियांशु अपने पिता संजीव के साथ पीठ पर जल टांगे हुए ले जाता मिला।
पिता संजीव की पुरानी यादें कई घाव देती है
पिता संजीव से जब हमने इतनी कम उम्र में कांवड़ ले जाने की वजह जानी तो हर कोई बच्चे में ही भोले को देखने लगा। पिता संजीव ने बताया कि उनके घर चार बच्चे पैदा हुए। चारों स्वस्थ थे, लेकिन चारों में से एक भी एक महीने तक जीवित नहीं रहे।
एक के बाद एक बच्चा स्वर्ग चलता गया। संतान सुख की आस खो चुके संजीव एवं उसकी पत्नी ने पांचवां बच्चे के पैदा होने पर होश संभालते ही उसके जीवन भर मेरठ स्थित पुरा महादेव में हर साल जलाभिषेक लाने का संकल्प लिया। दंपति के इस संकल्प के लेते ही प्रियांशु आज जिंदा है।
माता-पिता की इच्छा अनुसार इस बार वह सात साल की उम्र में दूसरी बार कांवड़ लेकर जा रहा है। नन्हे कांवड़िए प्रियांशु ने बताया कि वह माता-पिता की प्रतिज्ञा का पालन हर हाल में करेगा। उधर, पिता संजीव प्रियांशु को भगवान शिव की अमानत मान रहे हैं।