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सावधान! बाजार में बिक रही नकली दवाएं, नहीं हो पा रही रोकथाम

Mon, 20 Mar 2017 11:48 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 20 Mar 2017 11:48 AM IST
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Counterfeit drugs sold in the market
सांकेतिक चित्र

बाजारों-अस्पतालों में घटिया और नकली दवाएं धड़ल्ले से बिक रही हैं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिस्ट के शोध में यह जानकारी सामने आने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग इसकी रोकथाम में सक्षम नहीं है। दरअसल, उत्तराखंड में इस पर नियंत्रण का कोई कारगर सिस्टम है ही नहीं।

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दवाओं के नमूनों की जांच करने में राज्य की इकलौती लैब की सीमाएं हैं तो ड्रग विभाग में स्टाफ की कमी। फिलहाल बाजारों और अस्पतालों में नकली और घटिया दवाओं के बिक्री के संबंध में ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया का पत्र मिलने के बाद कार्यवाहक महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा. डीएस रावत ने इसकी रोकथाम के लिए वृहद अभियान चलाने के लिए कहा है।
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मरीज जिन दवाओं को यह सोचकर खा रहे हैं कि उन्हें स्वास्थ्य लाभ होगा, वही दवाएं उनकी मौत का सबब बन सकती हैं। ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया डा. जीएन सिंह ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग और दवाओं के डीलरों को आगाह करते हुए पत्र लिखा है। यह पत्र मिलने के बाद उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में हरकत हुई है, मगर यह कारगर साबित होगी इसमें संशय है।

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नहीं हो पाती सारे सैंपलों की जांच

Counterfeit drugs sold in the market
लैब - फोटो : demo pics

विभागीय सूत्र बताते हैं कि यहां रुद्रपुर के राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला में दवाओं के सैंपल भेजे तो जाते हैं, लेकिन स्टाफ और उपकरण न होने की वजह से सारे सैंपलों की जांच नहीं हो पाती।

इससे असली-नकली का पता ही नहीं चल पाता, फिर कार्रवाई को कौन कहे। लिहाजा यह धंधा प्रदेश में बेलगाम हो रहा है। पता चला है कि ड्रग विभाग के भेजे पांच सौ से अधिक सैंपलों की अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। अगर कभी जांच रिपोर्ट भेजने में जल्दी के लिए दबाव बनाया गया तो तकनीशियन स्तर की हल्की-फुल्की जांचें करके रिपोर्ट भेज दी जाती है।

बीते पांच सालों में ड्रग विभाग ने दून अस्पताल और मेडिकल स्टोरों से दवाओं के सैंपल राजकीय विश्लेषक के पास भेजे थे, लेकिन इन्हें दिल्ली भेज दिया गया। एक हजार से अधिक सैंपलों की रिपोर्ट ही नहीं आई है। ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया डा. सिंह ने ड्रग विभाग के साथ ही दवाओं के डीलरों से भी चौकन्ना रहने का अनुरोध किया है।

यह भी कहा है कि दवाएं भरोसेमंद एजेंसियों से ही खरीदें। शक होने पर इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। इतना ही नहीं सरकारी अस्पतालों और एनएचएम के वेलनेस सेंटरों को भी नकली दवाओं के संबंध में सचेत किया गया है। 

बड़े पैमाने पर शुरू किया जा रहा है अभियान

Counterfeit drugs sold in the market
medicine

नकली और घटिया दवाओं पर अंकुश लगाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया जा रहा है। जो दवाएं खरीदी जाती हैं, उनका पहले परीक्षण करवा लिया जाता है। इसके बाद टेंडर पास किया जाता है। बदनाम कंपनियों से खरीद पर सख्ती से रोक लगाई गई है। 
- कार्यवाहक महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा. डीएस रावत

राजकीय विश्लेषक लैब में स्टाफ की कमी थी। लोक सेवा आयोग ने स्टाफ का चयन कर दिया है। शुक्रवार को नियुक्ति पत्र दे दिया गया है। अब लैब में स्टाफ की कमी नहीं रहेगी।
- डा. जेपी देवशाली, संयुक्त निदेशक

नकली दवाओं की सबसे अधिक कंपनियां हिमाचल में

Counterfeit drugs sold in the market
मेडिकल स्टोर

नकली और घटिया दवाएं बनाने की सबसे अधिक कंपनियां हिमाचल प्रदेश में है। बहुत सी ऐसी कंपनियां जो सरकारी अस्पतालों में दवा की सप्लाई का ठेका लेती हैं।

दवाएं हिमाचल की कंपनियों से खरीद कर उस पर अपना स्टीकर चिपका देती हैं। तीन साल पहले दून, कोरोनेशन में दवा सप्लाई करने वाली हरिद्वार की कंपनी पकड़ी गई जिससे हिमाचल से दवा खरीद की पुष्टि हुई थी।

दवा डीलरों को ड्रग कंट्रोलर की सलाह
- दवाएं अधिकारिक और प्रतिष्ठित कंपनियों से लें
- नकली, घटिया दवाओं से बचने की कार्ययोजना तैयार करें
- थर्ड पार्टी निरीक्षण करवाएं
- फुटकर दुकानदार अपने कार्मिकों को प्रशिक्षित करवाएं 

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