घूसखोर अधिकारी को साढ़े तीन साल की जेल
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तीन दिन के ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के लिए सात हजार की रिश्वत लेते पकड़े गए देहरादून स्थित केंद्रीय खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के एडीओ को सीबीआई अदालत ने साढ़े तीन साल की कैद और छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर एक महीने का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।
विकासनगर निवासी संतराम के पुत्र प्रदीप कुमार ने वर्ष 2007 में फर्नीचर का काम करने के लिए सरकारी स्वरोजगार योजना के तहत पंजाब नेशनल बैंक, डाकपत्थर से चार लाख रुपये का ऋण लिया था।
इस ऋण पर खादी ग्रामोद्योग देहरादून को सब्सिडी का एक लाख 20 हजार का चेक पीएनबी डाकपत्थर को भेजना था। इसके लिए प्रदीप कुमार को केवीआईसी से तीन दिन के प्रशिक्षण प्रमाणपत्र की जरूरत थी।
तीन दिन के प्रमाणपत्र के लिए सात हजार
इस प्रमाणपत्र के लिए एडीओ राजेंद्र सिंह बिष्ट ने उससे 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में एडीओ सात हजार रुपये लेने के लिए राजी हो गया।
प्रदीप के पिता संतराम ने इसकी शिकायत एसपी सीबीआई से की थी। एक जुलाई 2009 को सीबीआई ने राजेंद्र सिंह बिष्ट सात हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अमित कुमार सिरोही की अदालत में हुई सुनवाई में लोक अभियोजक अधिकारी पंकज गुप्ता ने आरोपी को सख्त सजा सुनाए जाने की मांग की।
साथ चलेंगी दोनो सजाएं
अदालत ने सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत लेने के मामले में साढ़े तीन साल सजा, पांच हजार रुपये अर्थदंड और रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के मामले में साढ़े तीन साल सजा और एक हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।