Lockdown 4.0: उत्तराखंड में इस साल नहीं होंगे अधिकारियों-कर्मचारियों केे तबादले, शासनादेश जारी
- वार्षिक तबादला सत्र शून्य, शासनादेश जारी
- कोविड-19 के चलते सरकार ने लिया फैसला
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उत्तराखंड सरकार ने कोविड-19 के चलते अधिकारियों व कर्मचारियों का वार्षिक तबादला सत्र शून्य घोषित कर दिया है। कार्मिक विभाग ने बुधवार को इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया। आदेश के तहत इस साल तबादलों पर रोक रहेगी। केवल वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम की धारा -27 के तहत औचित्यपूर्ण प्रस्तावों पर ही तबादले हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तबादला सत्र शून्य घोषित करने को लेकर पहले ही संकेत दे दिए थे। प्रस्ताव पर उनकी मंजूरी प्राप्त होने के बाद बुधवार को अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने आदेश जारी कर दिए।
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सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, प्रभारी सचिवों, अपर सचिवों, मंडलायुक्तों, सभी जिलाधिकारियों, विभागाध्यक्षों व कार्यालयाध्यक्षों को इस बाबत सूचना जारी कर दी गई है। जारी आदेश में तबादला सत्र शून्य किए जाने की वजह कोविड-19 को बताया गया है।
कहा गया है कि राज्य में लॉकडाउन की स्थिति है। लॉकडाउन की अवधि में राज्य की आर्थिक गतिविधियां बंद होने के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कोविड-19 को महामारी घोषित किया गया है। ऐसी दशा में कर्मचारियों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्रा किए जाने पर संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहेगी।
अपरिहार्य मामलों में ही हो सकेंगे तबादले
तबादला सत्र शून्य होने के बावजूद विशेष परिस्थितियों व अपरिहार्य मामलों में तबादले हो सकेंगे। स्थानांतरण अधिनियम की धारा 27 में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ऐसे मामलों पर विचार करेगी। कार्मिक विभाग के आदेश के मुताबिक, किसी अधिकारी, कर्मचारी या विभाग को तबादलों को लेकर किसी प्रकार कठिनाई है तो वह समिति के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है। कमेटी को प्रस्ताव औचित्यपूर्ण लगा तो वह तबादले पर निर्णय ले सकती है।
दुर्गम में तैनात कार्मिकों को झटका
तबादला सत्र शून्य होने से दुर्गम में तैनात उन कर्मचारियों को झटका लगा है, जो वर्षों से वहां सेवाएं दे रहे हैं। उनमें से कई इस साल सुगम में तबादले की आस लगाए बैठे थे। पिछले साल भी सरकार ने वार्षिक स्थानांतरण को 10 फीसदी की सीमा से बांध दिया था। तब भी सीमित संख्या में ही तबादले हो सके थे।
शिक्षकों में भी निराशा
तबादला सत्र शून्य होने का सबसे अधिक असर सर्वाधिक शिक्षकों पर पड़ा है। शिक्षा विभाग में दुर्गम में तैनात शिक्षकों को बड़ी संख्या है। यही वजह है कि शिक्षा विभाग से जुड़े संगठन तबादला सत्र शून्य किए जाने का विरोध कर रहे थे।
कर्मचारी संगठनों ने आभार जताया
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश कार्यकारी महामंत्री अरुण पांडेय, अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच के प्रदेश प्रवक्ता पूर्णानंद नौटियाल समेत कई अन्य कर्मचारी संगठनों के
नेताओं ने तबादला सत्र शून्य करने पर प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है।