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कोरोना काल में सांकेतिक बगवाल : कोरोना से नहीं डिगे, परंपरा की खातिर खेली बगवाल 

Mon, 03 Aug 2020 09:07 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पाटी/देवीधुरा (चंपावत)
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पाटी/देवीधुरा (चंपावत) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 03 Aug 2020 09:07 PM IST
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Coronavirus in Uttarakhand : symbolic bagwal mela organised
bagwal - फोटो : amar ujala

कोरोना खतरे के बीच परंपरा की खातिर देवीधुरा के खोलीखांण दुबाचौड़ा मैदान में सोमवार को बगवाल (फल-फूलों से होने वाला संग्राम) खेली गई। हालांकि पहले बगवाल की रस्म को सिर्फ फर्रे के साथ मंदिर की परिक्रमा करके पूरा किया जाना था।

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तहसीलदार सचिन कुमार ने भी मंदिर कमेटी से बगवाल नहीं होने देने का आग्रह किया था। पर चारों खामों (गहरवाल, वालिग, चम्याल और लमगड़िया खाम) के योद्धा जब परिक्रमा पूरा करके मैदान में पहुंचे तो खुद को बगवाल खेलने से नहीं रोक सके। हाथ में फर्रे और फल-फूल के साथ मुंह में मास्क पहनकर करीब पांच मिनट तक बगवाल खेली गई।
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पिछले साल बगवाल नौ मिनट तक चली थी और एक लाख से अधिक लोग बगवाल के गवाह बने थे। सुबह 11.25 बजे मां बाराही धाम मंदिर के पंडित कीर्तिबल्लभ शास्त्री और भुवन जोशी की शंखध्वनि के साथ बगवाल का श्रीगणेश हुआ। हर खाम में 11-11 लोग थे। बगवाल महज पांच मिनट तक हुई।

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तीन योद्धा मामूली रूप से चोटिल

बगवाल देखने के लिए व्यापारियों सहित करीब एक हजार लोग मौजूद थे। बगवाल में तीन योद्धा मामूली रूप से चोटिल हुए। मैदान में प्रवेश करने से पहले चारों खामों और सात थोक (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया, वालिग, गोरना, कटना और फुलाराकोट) के योद्धाओं ने मां वज्र बाराही का जयकारा किया।

मैदान में वालिग खाम के बगवाली वीरों ने मुखिया बद्री सिंह बिष्ट के नेतृत्व में सबसे पहले प्रवेश किया। इसके बाद गंगा सिंह चम्याल के नेतृत्व में चम्याल खाम, वीरेंद्र सिंह लमगड़िया के नेतृत्व में लमगड़िया खाम और पान सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गहरवाल खाम के योद्धाओं ने बारी-बारी से मैदान में प्रवेश किया।

हर खाम के पांच-पांच योद्धाओं ने फर्रे के साथ मंदिर की परिक्रमा की। इसके फौरन बाद इन खामों ने फल-फूल बरसा कर बगवाल का श्रीगणेश कर दिया। मंदिर कमेटी ने दावा किया कि हर खाम के 11-11 रणबांकुंरों ने बगवाल खेली, मगर कुछ अन्य लोगों का कहना है कि बगवाल खेलने वालों की संख्या दोगुनी थी।

मंदिर के पुजारी धर्मानंद ने 11.30 बजे चंवर झूलाकर बगवाल समाप्त होने का संकेत किया। बगवाल पर विराम लगने के बाद चारों खामों के योद्धाओं ने कुशलक्षेम पूछने के साथ मां के सम्मुख शीश नवाया। बगवाल शुरू होने से पहले पंडित कीर्ति बल्लभ शास्त्री और डॉ.भुवन चंद्र जोशी ने मां बाराही देवी का पूजन किया। इस मौके पर मुख्य रूप से पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल, विधायक राम सिंह कैडा, एसडीएम आरसी गौतम, सीओ ध्यान सिंह, तहसीलदार सचिन कुमार, एसओ नारायण सिंह आदि मौजूद थे। 

ये हैं चारों खाम


लमगड़िया खाम : मंदिर कमेटी के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, खीम सिंह लमगड़िया, आन सिंह लमगड़िया, तारा सिंह, उमेद सिंह, किशन सिंह, लाल सिंह, दीवान सिंह।
वालिग खाम : मदन सिंह, शेर सिंह, गोपाल सिंह, राजू बिष्ट। 
चम्याल खाम: लाल सिंह चम्याल, बिशन सिंह, विनोद चम्याल, जगदीश सिंग्वाल, गौरव सिंग्वाल। 
गहरवाल खाम : जोध सिंह बिष्ट, डुंगर सिंह बिष्ट, मोहन बिष्ट, दिनेश चम्याल, बद्री सिंह बिष्ट, खुशाल सिंह, माधो सिंह, गोपाल बिष्ट, लाल सिंह, पान सिंह आदि योद्धा थे। 

बगवाल मेला घंटे-दर-घंटे: 

सुबह 6: 05 बजे : पूजा-अर्चना शुरू हुई। 
8:15 बजे : पूजा-अर्चना पूरी हुई। 
10:15 बजे: खामों का मंदिर में प्रवेश करना शुरू हुआ। 
10:45 बजे : मंदिर की परिक्रमा। 
11:23 बजे : बगवाल के लिए मैदान में प्रवेश। 
11:25 बजे : बगवाल का शुभारंभ। 
11:30 बजे : बगवाल का समापन। 
  
वर्ष:   - बगवाल का वक्त:    -      चोटिल 
2016-        7 मिनट-        59 योद्धा और 11 दर्शक 
2017-        8 मिनट-        11 योद्धा और 323 दर्शक 
2018-        8 मिनट-        112 योद्धा और 129 दर्शक  
2019-        9 मिनट-         98 योद्धा और 24 दर्शक 
2020-        5 मिनट-        3 योद्धा 

पहली बार नहीं हुई यह परंपरा 

देवीधुरा बगवाल में पहली बार एक भारी-भरकम शिला (पत्थर) को उठाने की रस्म नहीं हुई। मंदिर के सम्मुख खोलीखांण दुबचौड़ा मैदान में वर्षों से डेढ़ क्विंटल से अधिक वजन का यह पत्थर रखा है। मान्यता है कि इस पत्थर को उठाने से मन्नत पूरी होती है।

हर साल 70 से अधिक युवा श्रद्धालु इस पत्थर को उठाकर मैदान का चक्कर लगाते हैं। मगर पहली बार इस पत्थर को नहीं उठाने का लोगों को अफसोस है। ओखलकांडा के विनोद कुमार कहते हैं कि बीते नौ साल से वे पत्थर उठाते रहे हैं। पहली बार ऐसा नहीं कर सके।

बगवाल से रोकने पर तहसीलदार पर भड़की मंदिर समिति

बगवाल से रोकने की कोशिश करने वाले पाटी के तहसीलदार पर वालिग खाम के प्रतिनिधि, भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा और मंदिर समिति का पारा चढ़ गया। तहसीलदार सचिन कुमार के प्रयासों के बावजूद बगवाल तो नहीं रुकी, लेकिन वह निशाने पर जरूर आ गए।

आरोप लगाया कि तहसीलदार ने मंदिर परिसर में जूते पहनकर प्रवेश करके अवमानना की और अभद्रता करने के साथ माइक छीन मंदिर समिति का अपमान किया है। मंदिर समिति ने तहसीलदार पर कार्रवाई की मांग करते हुए डीएम को पत्र भेजा है। इधर तहसीलदार ने आरोपों को गलत बताया है। 

विवाद की शुरुआत परिक्रमा खत्म होने से कुछ देर पहले एक बगवाली योद्धा की ओर से नाशपाती का बोरा खोलीखांण मैदान में रखने से हुई। इसे देख तहसीलदार ने तुरंत मंच पर पहुंचकर माइक से बगवाल नहीं करने के लिए कहा। पर तब तक बगवाल शुरू हो गई। बगवाल खत्म होने के बाद भी तहसीलदार और मंदिर समिति के बीच कहासुनी हुई।

विधायक कैड़ा और मंदिर समिति के अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया ने कहा कि बगवाल से संबंधित सारी क्रियाकलाप पूरे नियम से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए किए गए। लेकिन तहसीलदार का रवैया कतई ठीक नहीं था। मंदिर समिति ने डीएम को पत्र भेज तहसीलदार का तबादला करने का अनुरोध किया है। इधर तहसीलदार सचिन कुमार का कहना है कि उन्होंने किसी के साथ अभद्रता नहीं की। जो कुछ मंदिर समिति के साथ हुई बैठक में तय था, उसका पालन कराने का प्रयास किया। 

तहसीलदार ने कुछ गलत नहीं किया। उन्होंने सिर्फ वहीं किया, जो बगवाल मेला होने से पहले से मंदिर समिति के साथ हुई बैठक में तय था। मैने पूरे मामले की जानकारी फोन से जिलाधिकारी को दे दी है। मंगलवार को पूरे प्रकरण की रिपोर्ट विधिवत भेज दी जाएगी।
- आरसी गौतम,  एसडीएम, पाटी

ये लिया गया था निर्णय: 

-सिर्फ 45 लोगों को होगी मां बाराही मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति। 
-बगवाल के बजाय फर्रे के साथ परिक्रमा की रस्म की जाएगी। 
-पांच घंटे देवीधुरा बाजार बंद रखने का निर्णय 

बाजार खुले होते तो कम होती भीड़

देवीधुरा बगवाल में बीते वर्षों तक बाहर से कारोबारी आते रहे हैं, बल्कि बाजार भी खुला रहता था। इस बार सुबह 10 बजे से शाम तीन बजे तक प्रशासन ने बाजार को बंद कराए जाने का आदेश दिया था। मंदिर समिति का कहना है कि ये निर्णय ठीक नहीं था। बाजार बंद होने से देवीधुरा के तमाम कारोबारी मंदिर की ओर आए। जिस कारण भीड़ में कुछ बढ़ोतरी हुई

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