उतराखंड में कोरोना: तहसील स्तर पर कोविड कर्फ्यू में ढील के आसार, सीएम ने तहसीलों से मांगी रिपोर्ट
उत्तराखंड में अब कोरोना संक्रमण के मामले धीरे-धीरे कम होने लगे हैं। इसके चलते अब सरकार कोविड कर्फ्यू में भी ढील देने की तैयारी कर रही है।
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उत्तराखंड में तहसील स्तर पर कोविड कर्फ्यू में रियायत देने के आसार हैं। प्रदेश सरकार कम संक्रमण दर वाली तहसीलों में बाजारों को खोलने की अनुमति दे सकती है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में तहसील स्तर पर पिछले 10 दिनों के कोरोना संक्रमण दर की स्थिति की रिपोर्ट जिलाधिकारियों से मंगाने का फैसला किया गया।
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शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से तहसील स्तर पर संक्रमण दर की रिपोर्ट मांगी है। संक्रमण दर के हिसाब से ही सरकार तहसीलों में रियायत देने पर विचार करेगी। यह पूरी तरह से कोरोना संक्रमण की स्थिति पर निर्भर करेगा। जिन इलाकों में कोरोना के मामले बढ़ेंगे, वहां सरकार सख्ती करेगी। बहरहाल, बैठक में जिलाधिकारियों से 10 दिनों के दौरान तहसील स्तर तक संक्रमण दर की जानकारी मांगी गई है।
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सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती
कोविड कर्फ्यू में रियायत देने में सरकार जल्दबाजी नहीं करना चाहती है। इसलिए उसने जिला स्तर पर संक्रमण की दर के बजाय उससे छोटी प्रशासनिक इकाई तहसील स्तर पर संक्रमण दर के हिसाब से ढील देनी की सोची है। राज्य में 110 तहसीलें और 18 उप तहसील हैं।
पांच प्रतिशत से कम संक्रमण दर वाले सात जिले
प्रदेश में पांच प्रतिशत से कम कोरोना संक्रमण दर वाले सात जिले हो गए हैं, इनमें अब देहरादून भी शामिल है। 27 मई से दो जून के संक्रमण के आंकड़ों के मुताबिक, देहरादून, यूएसनगर, हरिद्वार, चंपावत, बागेश्वर, टिहरी व उत्तरकाशी में पांच प्रतिशत से कम संक्रमण दर रही।
आढ़त बाजारों को मिलेगी रियायत
सरकार आढ़त बाजारों में सामान की लोडिंग व अनलोडिंग की अनुमति रात नौ बजे के बाद दे सकती है। बैठक में माना गया कि सुबह के समय लोडिंग और अनलोडिंग से जाम लगने और भीड़ बढ़ने की आशंका रहती है।
खतरा अभी टला नहीं है, सावधानी जरूरी है
कोरोना के घटते हुए मामलों को देखते हुए भले ही अब कोविड कर्फ्यू में ढील दिए जाने की मांग उठने लगी हो, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। इसलिए अगर कुछ छूट मिलती भी है तो कोरोना के प्रति बेहद सतर्क रहने की अभी जरूरत है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि पिछले दिनों जिस तरह से मरीजों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई थी, उसके मुकाबले अब अस्पतालों में बहुत कम मरीज हैं। रोजाना औसतन सात मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। ज्यादातर गंभीर मरीज हैं, जिन्हें ऑक्सीजन या आईसीयू की भी जरूरत पड़ रही है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. नारायणजीत सिंह ने बताया कि कर्फ्यू में ढील दिया जाना अब सही समय प्रतीत होता है। अगर कुछ घंटे के लिए बाजार पूरे खुल जाएंगे तो ऐसे में भीड़ बढ़ने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का उल्लंघन होने की बड़ी संभावना है। इसलिए पूरे दिन बाजार खुलते हैं तो फिर धीरे-धीरे लोग आते-जाते रहेंगे, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यही है कि मास्क का इस्तेमाल जरूर करें।
उधर, एमकेपी रोड स्थित आरोग्यधाम सुपर स्पेशियलिटी हेल्थ सिटी अस्पताल के निदेशक एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विपुल कंडवाल ने बताया कि अभी अचानक कर्फ्यू खुलने से बाजार में भीड़ बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 45 से 72 घंटे के दौरान बुखार और दस्त के मरीज भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में सरकार के साथ ही हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि देश और समाज को फिर से पिछले दिनों वाली भयंकर हालत में न जाने दें।