Coronavirus in Uttarakhand: संक्रमित मरीजों को अब प्लाज्मा और प्लेटलेट्स के लिए चुकानी होगी कीमत
- जनरल वार्ड में भर्ती हैं तो देने होंगे नौ हजार रुपये और प्राइवेट वार्ड के बारह हजार रुपये
- प्रभारी सचिव ने जारी किया आदेश, नो प्रोफिट नो लॉस के सिद्धांत पर लिया जाएगा शुल्क
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प्लाज्मा या प्लेटलेट्स के लिए अब कोरोना संक्रमित मरीज को कीमत चुकानी होगी। सरकारी या निजी अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती कोविड मरीज को नौ हजार रुपये और प्राइवेट वार्ड में भर्ती मरीज को 12 हजार रुपये देने होंगे।
प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडे ने बुधवार को इस आशय का आदेश जारी करते हुए प्लाज्मा/प्लेटलेट्स का शुल्क निर्धारित कर दिया है। नो प्रोफिट-नो लॉस के आधार पर राज्य के मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सालयों के जनरल वार्डों में भर्ती मरीज को एफरेसिस मशीन से प्लाज्मा और प्लेटलेट्स लेने पर नौ हजार रुपये और मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सालयों एवं निजी चिकित्सालयों के प्राइवेट वार्ड में भर्ती मरीज से 12 हजार रुपये शुल्क लिया जाएगा। राज्यपाल ने इसकी स्वीकृति दे दी है।
अगर कोई व्यक्ति बाहर से प्लाज्मा या प्लेटलेट्स लेकर आता है तो अस्पताल में निशुल्क चढ़ाया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों से अगर प्लाज्मा या प्लेटलेट्स ली जाती है तो उसके लिए निर्धारित शुल्क चुकाना होगा। प्लाज्मा और प्लेटलेट्स निकालने में लगने वाले उपकरण पर खर्च आता है। एक बार प्रयोग करने के बाद उपकरण को दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता है। ऐसे में उपकरण पर आने वाला ही खर्च लिया जा रहा है।
- युगल किशोर पंत, चिकित्सा शिक्षा निदेशक
पांच वेंटिलेटर, फिर भी नहीं किए जा रहे इस्तेमाल
रामनगर में पीपीपी मोड पर संचालित सरकारी अस्पताल को एक महीने पहले ही पांच वेंटिलेटर मिल चुके थे लेकिन इनका अभी तक इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। बुधवार को डीजी हेल्थ के निरीक्षण के दौरान थलीसैंण पौड़ी गढ़वाल से मरीज को लेकर आए तीमारदार की शिकायत के दौरान इसका खुलासा हुआ। तीमारदार ने डीजी हेल्थ को बताया कि वह जिस मरीज को लेकर आया है, उसकी हालत खराब है। उसका कोरोना टेस्ट किया गया लेकिन यहां वेंटिलेटर न होने पर मरीज को हल्द्वानी रेफर किया जा रहा है।
इस पर डीजी हेल्थ ने अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. मणि भूषण पंत से पूछा कि जब एक माह पहले पांच वेंटिलेटर अस्पताल को मिले हैं, तो फिर क्यों नहीं लगाए गए। चिकित्साधीक्षक ने बताया कि वेंटिलेटर लगाने वाले इंजीनियर अभी नहीं आए हैं, जो जल्द आएंगे। वहीं, डीजी हेल्थ ने डॉक्टरों को निर्देश दिए कि जब तक कोरोना रिपोर्ट न आ जाए तब तक किसी भी मरीज को हल्द्वानी न भेजा जाए।
ड्रेस में नहीं दिखे डॉक्टर, आशा वर्कर को लगी फटकार
पीपीपी मोड पर संचालित सरकारी अस्पताल का बुधवार को डीजी हेल्थ ने निरीक्षण किया। इस दौरान डॉक्टर और आशा वर्कर ड्रेस में नहीं दिखे तो डीजी हेल्थ ने फटकार लगाते हुए ड्रेस पहनने की हिदायत दी। उन्होंने बाद में मरीजों का हालचाल भी जाना।
स्वास्थ्य विभाग की कुमाऊं निदेशक शैलजा भट्ट ने सुबह सभी चिकित्सकों की ओपीडी में जाकर जांच-पड़ताल की। उन्होंने देखा कि डॉक्टर किस तरह से मरीजों की जांच कर रहे हैं और क्या-क्या परामर्श एवं दवाइयां मरीजों को दे रहे हैं। इसके बाद महिला वार्ड में भर्ती मरीजों का हाल जाना। डीजी हेल्थ के अनुसार अस्पताल अब पीपीपी मोड पर चल रहा है। अस्पताल मरीजों को किस तरह का उपचार दिया जा रहा है, इसकी जांच पड़ताल के लिए निरीक्षण किया।
डीजी हेल्थ के सामने आया किडनी प्रकरण
अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला की अस्पताल की लैब में जांच हुई, जिसमें उसकी एक किडनी होने की बात सामने आई थी। इस पर महिला ने काशीपुर में जांच कराई तो पता चला कि उसकी दोनों किडनियां सुरक्षित हैं। इस पर डीजी हेल्थ ने कहा कि अभी मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इस प्रकरण की जांच की जाएगी।