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Corona in Uttarakhand: गुरुवार को 386 नए संक्रमित मिले, छह मरीजों की मौत 

Thu, 19 Nov 2020 09:20 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 19 Nov 2020 09:20 PM IST
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Coronavirus in Uttarakhand latest update today: 386 new infected Found, six patients died
- फोटो : फाइल फोटो

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे के भीतर छह कोरोना मरीजों की मौत और 386 संक्रमित मामले मिले हैं। पहाड़ों में कोरोना संक्रमण का असर कम हुआ है, लेकिन देहरादून जिले में संक्रमितों की रफ्तार बढ़ रही है। वहीं, 388 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया है। कुल संक्रमितों की संख्या 69693 हो गई है।  

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को 10179 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। जबकि 386 लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं। आज देहरादून जिले में सबसे अधिक 137 कोरोना संक्रमित मिले हैं। नैनीताल में 53, पिथौरागढ़ में 37, हरिद्वार में 35, पौड़ी में 29, ऊधमसिंह नगर में 25, चमोली में 21, टिहरी में 13, बागेश्वर में 13, रुद्रप्रयाग में आठ, अल्मोड़ा में छह, चंपावत में पांच और उत्तरकाशी जिले में चार संक्रमित मामले मिले हैं। 
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आज मृतक छह संक्रमित मरीजों में से दून मेडिकल कॉलेज में दो, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में दो, एचएनबी बेस हॉस्पिटल श्रीनगर में एक और सेना अस्पताल पिथौरागढ़ में एक मरीज ने दम तोड़ा है। 

प्रदेश में अब तक 1133 संक्रमित मरीजों की मौत हुई है। वहीं, 388 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। इन्हें मिला कर ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 63808 हो गई है। वर्तमान में प्रदेश में विभिन्न अस्पतालों और होम आइसोलेशन में 4133 मरीजों का इलाज चल रहा है। 

यात्रियों की स्क्रीनिंग के नहीं इंतजाम

दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर ने धर्मनगरी की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। दिल्ली से रोजाना सैकड़ों यात्री उत्तराखंड और दूसरे राज्यों की परिवहन निगमों की बसों से हरिद्वार पहुंच रहे हैं। यहां यात्रियों की स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं है।

दूसरे राज्यों के निगम की बसें अड्डे के बाहर ही यात्रियों को उतार रही हैं। सफर करने वाले अधिकतर यात्री भी लापरवाही बरत रहे हैं। मास्क पहनना जरूरी नहीं समझकर खुद के साथ दूसरों की जिंदगी भी दाव पर लगा रहे हैं। ऐसे में हरिद्वार में कोरोना संक्रमण के फैलाव का खतरा लगातार बढ़ रहा है। 

कोरोना के फैलाव के लिहाज से हरिद्वार अति संवेदनशील जिला रहा है। पहले चरण में यहां प्रदेश में अधिक कंटेनमेंट जोन रहे हैं। अनलॉक में बसों का संचालन शुरू होने पर स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग हो रही थी। कोरोना आशंकित लोगों की पहचान होने पर कोविड सैंपल के लिए अस्पताल भेजा जा रहा था।

इससे काफी हद तक संक्रमण के फैलाव पर काबू हुआ। पॉजिटिव मरीज मिलने की दर गिरने से लोगों की लापरवाही बढ़ने के साथ रोडवेज स्तर पर भी परिसर में स्क्रीनिंग की व्यवस्था बंद हो गई।

दिल्ली में संक्रमण की दूसरी लहर तेज होने से वहां कई पाबंदियां लगनी शुरू हो गई हैं। लेकिन बसों से हरिद्वार पहुंचने वाले यात्री संक्रमण के कैरियर के वाहक बन सकते हैं। अकेले हरिद्वार डिपो की 20 से अधिक बसें दिल्ली रूट पर रोजाना संचालित हो रही हैं।

इसके अलावा देहरादून, ऋषिकेश डिपो की बसें भी हरिद्वार होकर गुजरती हैं और सवारियां उतारती हैं। इनके अलावा पंजाब, हिमाचल और हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली परिवहन निगम की बसें भी सवारियां लेकर आती हैं। 

ट्रेनों से पहुंचने वाले 314 यात्री होम क्वारंटीन
ट्रेनों का संचालन बढ़ने के साथ यात्रियों की संख्या भी बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग ट्रेनों से आने वाले यात्रियों की रैंडम स्क्रीनिंग कर रहा है। इसमें कई आशंकित मिल रहे हैं। बुधवार को अलग-अलग ट्रेनों से हरिद्वार स्टेशन पर उतरे 1962 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 310 लोग आशंकित मिले और उनको होम क्वारंटीन किया गया।

इलाज में देरी जान पर पड़ सकती है भारी

सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी ने कहा कि कोरोना संक्रमण के इलाज में देरी करने से खतरा ज्यादा बढ़ सकता है। यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण के सामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टरों से परामर्श लेकर इलाज कराएं। 

बृहस्पतिवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में अनौपचारिक वार्ता में सचिव ने कहा कि त्योहारी सीजन में बाजारों में भीड़भाड़ और सर्दी बढ़ने से कोरोना संक्रमण से बचाव को और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

संक्रमण की रोकथाम के लिए अटल आयुष्मान कार्यालय में हेल्पलाइन स्थापित किया गया। जहां पर आयुष्मान में उपलब्ध डाटा के आधार पर कंट्रोल रूम में 40 लैंडलाइन फोन से प्रतिदिन तीन से चार हजार लोगों से संपर्क कर स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली जा रही है।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों से यह बात सामने आई है कि संक्रमण के लक्षण दिखाई देने के बाद भी लोग इलाज में देरी कर रहे हैं। ये लापरवाही जान पर भारी पकड़ सकती है। सचिव ने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 10 से 12 हजार सैंपल की जांच की जा रही है। विभाग का प्रयास है कि गांवों में 48 घंटे और मैदानी इलाकों में 24 घंटे के भीतर सैंपल की जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। 

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