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Coronavirus in Uttarakhand : इस बार नहीं होगा 149 साल पुराना ऐतिहासिक जौलजीबी मेला

Sat, 31 Oct 2020 08:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 31 Oct 2020 08:01 PM IST
सार

  • कोरोना ने तोड़ी वर्षों पुरानी परंपरा, एसडीएम की जनप्रतिनिधियों संग बैठक में हुआ निर्णय

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coronavirus in uttarakhand latest news : this year jauljibi mela 2020 will not organised
जौलजीबी मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करते कलाकार - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

विस्तार

इस बार 149 साल पुराना ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय जौलजीबी मेला नहीं होगा। प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों की बैठक में कोरोना संक्रमण के कारण मेले का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया गया। धारचूला एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला ने जौलजीबी पंचायत घर में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की।

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बैठक में सरपंच तारा चंद, टीका प्रसाद और बसंती देवी सहित अन्य लोगों ने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार जौलजीबी मेले का आयोजन नहीं करना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता शकुंतला दताल और व्यापार मंडल अध्यक्ष धीरेंद्र धर्मशक्तू ने भी आयोजन नहीं करने की राय दी।
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सामाजिक कार्यकर्ता लीला बनंग्याल ने परंपरा बरकरार रखने के लिए 14 नवंबर को मेले की शुरूआत के दिन गाइडलाइन का पालन करते हुए कलश यात्रा और कुछ कार्यक्रमों का आयोजन करने का सुझाव दिया। एसडीएम ने बताया कि कोरोना के कारण इस बार मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा। बैठक में खंड शिक्षा अधिकारी एमआर लोहिया, थानाध्यक्ष विक्रम राठौर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अमर चंद आदि ने शिरकत की।

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1871 में राजा पुष्कर पाल ने शुरू कराया था मेला 

महाकाली और गोरी नदी के संगम पर 1871 में अस्कोट के तत्कालीन राजा पुष्कर पाल ने ज्वालेश्वर मंदिर स्थापित किया था। इसी साल मेले की शुरुआत हुई थी। धीरे-धीरे मेले का विस्तार होता रहा। बाद में इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मेले के रूप में पहचान मिली। वर्ष 1962 से पहले इस मेले में बड़ी संख्या में तिब्बती व्यापारी भी आते थे लेकिन भारत-चीन युद्ध के बाद यहां तिब्बती व्यापारियों ने आना बंद कर दिया। मेले में स्थानीय व्यापारी तिब्बत से सामान लेकर इसकी बिक्री करते हैं। 

नेपाल के हुमले-जुमले घोड़ों की रहती है काफी मांग

धारचूला। जौलजीबी मेले में हर वर्ष मित्र राष्ट्र नेपाल से हुमला-जुमला के घोड़े आते हैं। हुमला जुमला के घोड़े काफी शक्तिशाली होते हैं, जिस कारण इनकी भारतीय बाजारों में काफी मांग रहती है।  यूपी सहित अन्य प्रदेशों से आए व्यापारी इन घोड़ों को खरीदकर ले जाते हैं।

गर्म कपड़े और जड़ी बूटियों की होती है खूब बिक्री 

मेले में गर्म कपड़े चुटके, थुलमे, कंबल, स्वेटर बर्तन, कृषि यंत्र, जड़ी बूटी सहित कई अन्य सामान की बिक्री होती है। इस मेले मे नेपाल के साथ-साथ भारत के यूपी सहित कई अन्य प्रदेशों से बड़ी संख्या में व्यापारी आते हैं।  

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