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Coronavirus in Uttarakhand : निजी अस्पताल कर सकेंगे कोरोना मरीजों का इलाज, गाइडलाइन जारी 

Sat, 22 Aug 2020 07:42 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 22 Aug 2020 07:42 PM IST
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coronavirus in uttarakhand latest news :  Private hospital will be able to treat corona patients, guidelines released
Corona - फोटो : PTI

प्रदेश सरकार ने निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके तहत नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड ऑफ हास्पिटल एंड हेल्थ केयर (एनएबीएच) से मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों ही कोरोना मरीजों का इलाज कर सकेंगे।

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इन अस्पतालों का क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट (नैदानिक स्थापना अधिनियम) में पंजीकरण होना भी जरूरी है। गाइडलाइन के अनुसार निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अलग से वार्ड होना चाहिए।
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जिसमें प्रवेश और निकासी के द्वार अलग-अलग होंगे। अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ तैनाती और आईसीयू की सुविधा होनी चाहिए। आईसोलेशन वार्ड में प्रत्येक बेड में ऑक्सीजन, बायो मेडिकल वेस्ट के लिए उचित व्यवस्था, कोविड मरीजों के लिए अलग से एंबुलेंस होनी चाहिए। 

एनएबीएच से मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों को ही कोरोना मरीजों के इलाज की अनुमति दी गई है। कोरोना मरीजों के इलाज में मानकों का पूरी तरह से पालन हो। इसके लिए एनएबीएच से मान्यता होने की शर्त रखी है। प्रदेश में ऐसे निजी अस्पतालों की संख्या सीमित है।
- डॉ.पंकज कुमार पांडेय, प्रभारी सचिव, स्वास्थ्य

होम आईसोलेशन में नियमों का पालन न करने पर होगी कड़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार ने लक्षण रहित (एसिंप्टोमेटिक) कोरोना संक्रमितों को होम आइसोलेशन की सुविधा दी है। कुछ मामलों में होम आईसोलेशन में रह रहे लोगों के घर से बाहर निकलने की बात सामने आई है। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए होम आईसोलेशन की जिम्मेदारी लेने के बाद अनुपालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शनिवार को सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों के साथ कोविड के नियंत्रण की समीक्षा की। सीएम ने कहा कि वर्तमान में प्रतिदिन पांच हजार से अधिक सैंपलों की जांच की जा रही है। इसे बढ़ाकर 10 हजार प्रतिदिन किया जाए। सैंपल जांच में पैसा खर्च करने में जिलाधिकारी किसी तरह से संकोच न करें। 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों की सैंपल जांच विशेष ध्यान दिए जाए। इससे समय पर उनकी देखभाल और इलाज हो सके।

सीएम ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों से प्रयोगशाला तक सैंपल भेजने में देरी हो रही है। इसके लिए हेलीकॉप्टर से सैंपल भेज सकते हैं। जांच में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कोरोना योद्धाओं के लिए बनाए गए चिकित्सा सेतु मोबाइप एप का शुभारंभ किया।

इस एप को डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स, सुरक्षा कर्मी पुलिस और कोरोना ड्यूटी में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। मुख्यमंत्री के सामने होम आईसोलेशन पर बनाए गए एप आरोग्य रक्षक का प्रस्तुतीकरण भी दिया। सीएम ने निर्देश दिए कि कोरोना पर नियंत्रण के साथ डेंगू से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने को अभियान चलाया जाए। 

सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने कहा कि हाई रिस्क क्षेत्र से आने वाले लोगों, संदिग्ध संक्रमितों की शत प्रतिशत सैंपलिंग की जाए। अस्पतालों में आईसीयू, आक्सीजन बेड एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की पूर्ण उपलब्धता रखी जाए। जिलाधिकारी कुछ प्राइवेट हॉस्पिटल भी चिन्हित करें।

जिससे आवश्यकता पड़ने पर इन अस्पतालों में टेस्टिंग की जा सके और लोगों का इलाज हो। प्रत्येक जनपद में एक ऐसा सेंटर बनाया जाए, जहां पर हाई रिस्क क्षेत्र एवं बाहर से आने वालों की सैंपलिंग हो सके। इस मौके पर मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविंद्र दत्त, प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, एसए मुरुगेशन, आईजी संजय गुंज्याल, गढ़वाल आयुक्त रविनाथ रमन, कुमाऊं आयुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमित उप्रेती समेत सभी जिलों के डीएम मौजूद थे। 

संक्रमण को सामुदायिक प्रसार से रोकना जरूरी

मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि कोरोना को सामुदायिक प्रसार से रोकना जरूरी है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंहनगर एवं नैनीताल जनपद में विशेष सतर्कता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी नैनीताल ने जो जीआईएस मैपिंग बेस्ड सॉफ्टवेयर तैयार किया है, यह सॉफ्टवेयर बहुत उपयोगी है। चारों मैदानी जनपदों में जल्द इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाए। कंटेनमेंट जोन बनाने में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। बाहरी राज्यों से जो लोग आ रहे हैं, उनके आने के कारणों के लिए कागजों की पूरी छानबीन की जाए। 

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