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उत्तराखंड में कोरोना : खुले में बायो मेडिकल वेस्ट फेंकने पर पीसीबी खफा, सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को लिखा पत्र 

Fri, 07 May 2021 01:04 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 07 May 2021 01:04 PM IST
सार

इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को कड़ा पत्र लिखा है।

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coronavirus in uttarakhand latest news : PCB angry over throwing bio medical waist in open
बायो मेडिकल वेस्ट - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

कोरोना महामारी के बीच निजी व सरकारी अस्पतालों के साथ ही श्मशान घाटों के आसपास बायो मेडिकल वेस्ट (पीपीई किट और मास्क) फेंके जाने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने कड़ी नाराजगी जताई है। इस संबंध में पीसीबी ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को कड़ा पत्र लिखा है। 

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव के पत्र के अनुसार कोरोना महामारी के बीच अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न की जाए और जो भी अस्पताल नियमानुसार बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही बरत रहे हैं तो उनके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण अभियंता डॉ. अंकुर कंसल का कहना है कि बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में यदि किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती जाती है तो इसका सीधा असर आमजन की सेहत पर पड़ेगा। खासकर कोरोना के दौर में खुले में पीपीई किट और मास्क फेंकने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।
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ऐसे में यह सुनिश्चित कराया जाए कि कहीं भी खुले में इस्तेमाल की हुई पीपीई किट और मास्क न फेंके जाएं। यदि कोई ऐसा करता पकड़ा जाए तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। डॉ. कंसल का कहना है कि अस्पतालों और श्मशान घाटों के पास खुले में पीपीई किट मास्क पाए जाते हैं तो इसको इकट्ठा करने की जिम्मेदारी संबंधित नगर निगम व नगर पालिकाओं की है। ऐसे पीपीई किट व मास्क वैज्ञानिक विधि से निस्तारित कराए जाएं। 

लक्सर स्थित इंडस्ट्रियल सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में होगा निस्तारण

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल निजी कंपनी की मदद से रुड़की और गदरपुर में लगाए गए कामन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में निकलने वाले कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है किया जा रहा है।
उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण अभियंता डॉ. अंकुर कंसल के अनुसार राजधानी देहरादून के साथ कुमाऊं और गढ़वाल के सभी अस्पतालों में प्रतिदिन औसतन दो मीट्रिक टन बायोमेडिकल वेस्ट निकल रहा है।

इसमें से 1700 किलोग्राम बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण रुड़की और गदरपुर स्थित कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में उपचारित किया जा रहा है। 200 किलोग्राम बायोमेडिकल वेस्ट अस्पतालों में लगाए गए प्लांट में उपचारित किए जा रहे हैं। 100 किलोग्राम बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण ‘डीप बरियल मैथड’ से किया जा रहा है।

ट्रीटमेंट प्लांट में आठ मीट्रिक टन बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की क्षमता

डॉ. अंकुर कंसल के मुताबिक फिलहाल राज्य में स्थापित दोनों कामन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में बायोमेडिकल को उपचारित करने की क्षमता आठ मीट्रिक टन है। फिलहाल अस्पतालों में दो मीट्रिक टन बायोमेडिकल निकल रहा है, ऐसे में अभी स्थितियां नियंत्रण में हैं।

कोरोना से बायोमेडिकल बेस्ट की मात्रा पर नहीं पड़ा कोई असर

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक राजधानी देहरादून समेत सभी जिलों में कोरोना ने बेशक पांव पसार दिया है और हजारों की संख्या में मरीज विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इसके बावजूद अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट की मात्रा पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। डॉ. कंसल के मुताबिक कोरोना मरीजों के इलाज में कोई खास बायोमेडिकल नहीं निकल रहा है। अलबत्त पीपीई किट और मास्क समेत कुछ चीजें जो बायो मेडिकल वेस्ट के तौर पर निकल रही हैं। इनका निस्तारण कराया जा रहा है।


लक्सर स्थित इंडस्ट्रियल सॉलिड़ वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में होगा निस्तारण

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण अभियंता डॉ. अंकुर बंसल के मुताबिक कोरोना संक्रमण बढ़ने से स्थितियां और गंभीर हो गई हैं। अस्पतालों से बायो मेडिकल वेस्ट निकालने की क्षमता में बहुत अधिक वृद्धि होती है तो इनमें से कुछ बायोमेडिकल वेस्ट लक्सर स्थित इंडस्ट्रियल सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में निस्तारित किए जाएंगे। इस संबंध में कार्य योजना पहले से ही तैयार कर ली गई है। 

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