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Coronavirus Uttarakhand : बड़े-बड़ों को हराने वाले कोरोना को नवजातों ने हराया

Wed, 16 Dec 2020 04:02 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 16 Dec 2020 04:02 PM IST
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Uttarakhand COVID-19 News: new born baby defeated corona
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : उत्तराखंड में कोरोना

पूरी दुनिया के लिए खौफ का पर्याय बन चुका कोरोना नवजातों के सामने बेअसर साबित हुआ है। यहां तक कि गर्भवती मां से नवजात में संक्रमण फैलने की दर भी बेहद कम है।

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वहीं, दूसरी ओर जो नवजात संक्रमित हुए भी, उनकी रिकवरी अन्य आयु वर्गों की तुलना में बहुत बेहतर रही। दून महिला अस्पताल और कोविड-19 अस्पताल के आंकड़े इसकी तस्दीक भी करते हैं।
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दून महिला अस्पताल में पूरे कोरोना काल के दौरान अब तक 117 संक्रमित गर्भवतियों की डिलीवरी हुई है। इसमें से 66 सिजेरियन और 51 डिलीवरी नॉर्मल हुई।

शुरुआत में डॉक्टरों को गर्भवती मां से नवजात में भी संक्रमण फैलने का खतरा लग रहा था। लेकिन दो को छोड़कर बाकी किसी मामले में ऐसा नहीं हुआ। गर्भवती मां से केवल दो नवजातों में ही संक्रमण फैला। मां के संक्रमित होने के बावजूद बाकी सभी नवजात कोरोना से पूरी तरह बचे रहे। 

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नवजात पर कोरोना बहुत ज्यादा असर नहीं कर पाया

दूसरी ओर, इस दौरान 60 से ज्यादा संक्रमित नवजात अस्पताल में भर्ती हुए। इनमें से 58 उपचार के बाद कोरोना से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। एक नवजात की हालत गंभीर होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसमें कोरोना की जानकारी भी बहुत देर से मिली। उपचार के दौरान नवजात की मौत हो गई। वहीं, बाकी अन्य सभी नवजात इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं।

नवजात मां के संपर्क में रहता है। इसलिए मां के संक्रमित होने पर खतरा भी ज्यादा रहता है। उसके बावजूद नवजात पर कोरोना बहुत ज्यादा असर नहीं कर पाया। हमने नवजातों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय किए और इस बात की खुशी है कि हम अधिकांश नवजातों को ठीक करने में कामयाब रहे हैं। 
-डॉ. रीना पाल, गायनोकोलॉजिस्ट, दून महिला अस्पताल

नवजातों को बहुत अधिक केयर के साथ रखना पड़ता है। गर्भवती मां के संक्रमित होने पर नवजातों को निकू वार्ड में बेहद सावधानी के साथ इलाज दिया गया। नवजातों का रिकवरी रेट बहुत अच्छा है। जिन दो मामलों में नवजातों की मौत हुई, उनमें से एक बहुत देरी से अस्पताल पहुंचा था। 
-डॉ. संजीव, बाल रोग विशेषज्ञ, दून अस्पताल

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