Corona in Uttarakhand : कोराना काल की विपत्ति में परिवार का मजबूत आर्थिक संबल बनीं श्रमिक महिलाएं
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कोराना काल में जब श्रमिकों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराया तो उन्होंने रसोई के साथ ही आर्थिक मोर्चा भी संभाला। गरीब महिलाएं घर की चौका-चूल्हे की दहलीज लांघकर परिवार को आर्थिक संबल देने के लिए सरकार की मनरेगा योजना में प्रतिदिन 201 रुपये की दिहाड़ी में लग गई हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार जिले में 7,644 महिला श्रमिकों ने मनरेगा के तहत 100 दिन की मजदूरी प्राप्त की।
ऊधम सिंह नगर जिले में वर्ष 2019 में 17 हजार 743 महिलाओं को मनरेगा से रोजगार प्राप्त किया। जबकि इस वर्ष की मनरेगा योजना में 25,387 महिलाएं काम कर रही हैं। यानी पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष 7,644 महिलाओं ने मनरेगा के तहत मजदूरी की।
खटीमा विकासखंड में सबसे अधिक महिलाओं ने मनरेगा के तहत मजदूरी की। खटीमा में पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल 3,991 महिलाओं ने मनरेगा में मेहनत मजदूरी की है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों के साथ ही महिलाएं विभिन्न निर्माण कार्यों में जुटी हुई नजर आ रही हैं।
चार महीने में और बढ़ सकती है महिलाओं की संख्या
जिले में इस वर्ष नवंबर तक 7,644 महिला श्रमिक मनरेगा के तहत कार्य कर रही हैं। जबकि वित्तीय वर्ष पूरा होने में अभी चार माह शेष हैं। इन चार माह में महिला श्रमिकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
जिले में इस साल महिला मजदूरी की बढ़ी संख्या
ब्लॉक- वर्ष 2019- वर्ष 2020
बाजपुर- 2234- 2200
गदरपुर-1477- 1775
जसपुर- 1789- 2305
काशीपुर- 1624-1480
खटीमा- 5228-9219
रुद्रपुर- 1566-2488
सितारगंज- 3825-5920
कुल- 17743- 25387
मनरेगा के तहत 40 प्रतिशत महिलाओं को काम देना जरूरी है। इस वर्ष ऊधमसिंह नगर जिले में लक्ष्य से अधिक 46 प्रतिशत महिलाएं मनरेगा के तहत काम कर रही हैं। महिलाएं गूल निर्माण, सड़क निर्माण, पत्थर तोड़ने के साथ ही विभिन्न कार्य कर रही हैं।
- हिमांशु खुराना, मुख्य विकास अधिकारी