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Coronavirus in Uttarakhand : संक्रमण से जूझ रहे और इलाज के बाद ठीक हो चुके लोगों पर एंजाइटी का असर

Fri, 25 Sep 2020 01:59 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 25 Sep 2020 01:59 PM IST
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coronavirus in uttarakhand latest news : Effect of anxiety on people battling corona and recovering after treatment
- फोटो : अमर उजाला (File Photo)

कोरोना संक्रमण से जूझ रहे और इलाज के बाद ठीक हो चुके ज्यादातर लोग अब भी डरे हुए हैं। उन पर अभी एंजाइटी का असर है। अमर उजाला से कोविड-19 को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बीमारी की भयावहता की जानकारी दी। साथ ही पाठकों से बीमारी को लेकर लापरवाह ना होने की अपील की।

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उन्होंने कहा कि कोविड-19 से सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करें। किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर डॉक्टरों से संपर्क करें और अपने साथ-साथ परिवार को भी खतरे से बचाएं। ऐसे ही पांच मरीजों की कहानी हम आपके सामने रख रहे हैं, जो कोरोना से जूझ रहे हैं या इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं।
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मोहन खत्री ने 17 दिन में कोरोना को हराया

वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी मोहन खत्री (58) ने 17 दिन अस्पताल में संघर्ष करने के बाद कोरोना को मात दी। वे स्वस्थ होने के बाद अब घर लौट चुके हैं, लेकिन कोरोना के शुरुआती दौर में वो जिस पीड़ा और मुश्किल से गुजरे, वो किसी की भी हिम्मत तोड़ सकती है। उन्होंने बताया कि 31 अगस्त को उन्हें काफी बुखार आ गया। उन्होंने कोरोना टेस्ट कराया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

पत्नी और बेटे की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। वे एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हो गए। हालांकि वहां उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। उन्हें सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी। इसके बाद उनको जौलीग्रांट अस्पताल में भर्ती कराया गया। 17 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उनको वह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे सुधर रहा है, लेकिन अभी भी कई बार उन्हें एंजाइटी हो रही है।

सांस लेना हो गया मुश्किल

देहरादून। वसंत बिहार निवासी अरविंद ने बताया कि अगस्त अंत में उनको तेज खांसी होने लगी। साथ में हल्का बुखार भी आ गया। सितंबर की शुरुआत में उनको सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी। इस पर उन्होंने कोरोना टेस्ट कराया तो रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। अस्पताल में संपर्क करने पर उन्होंने सुबह भर्ती करने की बात कही।

अरविंद ने बताया कि वह पूरी रात बेहद मुश्किल से कटी। सांस लेना लगातार मुश्किल होता जा रहा था। बीच-बीच में तो ऐसा लगा जैसे अब बचना मुश्किल है। तेज बुखार और उसके साथ हो रही खांसी ने परेशानी बढ़ा दी। किसी तरह तड़पते हुए रात काटी। सुबह होते ही दोबारा अस्पताल में संपर्क किया। 17 दिन बीतने के बाद अब उनका स्वास्थ्य काफी बेहतर है। अब भी चलने में परेशानी हो रही है और शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है।

शुरुआती तीन दिन हुई असहनीय पीड़ा

रुड़की निवासी अमित देहरादून में रहकर नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया दो सितंबर को उन्हें हल्की खांसी होने लगी, जो तीन सितंबर तक बेहद तेज हो गई। इस दौरान गला पूरी तरह सूख गया। खराश के साथ होने वाली खांसी से दम निकलने की स्थिति हो गई। जांच कराई तो कोरोना पॉजिटिव निकला।

डॉक्टरों से संपर्क के बाद अस्पताल में भर्ती हुए। उन्होंने बताया शुरुआत के तीन दिन असहनीय पीड़ा हुई, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगा। कुछ दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल दे दी गई। उन्होंने बताया फिलहाल वो होम क्वारंटीन हैं और घर पर ही आराम कर रहे हैं।

एंजाइटी ने बढ़ा दी मेरी परेशानी

नेहरू कॉलोनी निवासी पुनीत ने बताया कि 14 तारीख को उनको हल्का बुखार आया। साथ ही खांसी भी होने लगी। घरवालों ने कहा कि मैं कोरोना की जांच करा लूं, लेकिन मैं बेहद डर गया। मुझे एंजाइटी हो गई और ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया। मेरा शरीर भी कांपने लगा और लगा कि शायद कोरोना मेरी जान ले लेगा।


हालांकि मेरे दोस्तों और घरवालों ने फोन पर मुझसे बातचीत जारी रखी। इससे मैं थोड़ा सा सामान्य हुआ। अगले दिन सुबह मैं जांच कराने गया तो रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद शाम तक मैं पूरी तरह सामान्य हो गय, लेकिन एंजायटी ने एक बार के लिए मुझे बेहद डरा दिया था।

इलाज की गाइडलाइन का कर रहा पालन

माता मंदिर रोड निवासी सुधीर ने बताया कि तीन दिन पहले उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उन्हें हल्का बुखार और खांसी हो रही थी। इस पर वो शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हो गए। अस्पताल में कोविड-19 की इलाज की गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं। दूसरे ही दिन उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार आया और अब वह अच्छा महसूस कर रहे हैं।

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