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Coronavirus in Uttarakhand : 15 विधायकों ने दी विस सत्र से वर्चुअल जुड़ने की सहमति, 23 को प्रस्तावित है सत्र

Tue, 22 Sep 2020 10:44 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 22 Sep 2020 10:44 AM IST
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coronavirus in uttarakhand latest news : 15 MLAs connect virtual assembly session
विधानसभा सत्र - फोटो : File Photo

विधानसभा सत्र में वर्चुअल भागीदारी करने के लिए अब तक 15 विधायक अपनी सहमति दे चुके हैं। ये सभी विधायक अपने जिले में राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) के वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम से जुड़ेंगे और वर्चुअल भागीदारी करेंगे।

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विधायकों की सुविधा के लिए विधानसभा में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इस कंट्रोल रूम में अनुभाग अधिकारी को नोडल अफसर बनाया गया है। पांच लोगों की इस टीम में समीक्षा अधिकारी व सहायक समीक्षा अधिकारी होंगे। 
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इस कंट्रोल रूम के माध्यम से वर्चुअल जुड़ने वाले सदस्यों को मांगी जानी वाली सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ये सूचनाएं उन्हें व्हाट्स एप, ईमेल और फैक्स के माध्यम दी जाएंगी। जिले स्तर पर जिलाधिकारियों को सत्र का नोडल अधिकारी बनाया गया है। एनआईसी कार्यालयों में एसआईओ को नोडल अधिकारी बनाया गया है। 
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वर्चुअल जुड़ेंगे ये विधायक

विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, बिशन सिंह चुफाल, चंदन राम दास, नवीन दुम्का, संजीव आर्य, जार्ज आईवान ग्रेगरी मैन, भरत चौधरी, राजकुमार, गणेश जोशी, ऋतु खंडूड़ी, दिलीप रावत, महेश नेगी, पुष्कर सिंह धामी, चंद्रा पंत व हरभजन सिंह चीमा।
 

सत्र से पहले विधायकों को एक-एक करोड़

विधानसभा सत्र से दो दिन पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधायक विकास निधि के तहत एक-एक करोड़ रुपये धनराशि मंजूर कर दी। कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण गहराए आर्थिक संकट के चलते सरकार के हाथ बंधे थे और वह विकास निधि जारी नहीं कर पा रही थी। अपने चुनाव क्षेत्रों के विकास को लेकर विधायक भी व्यथित दिखाई दे रहे थे।

लेकिन अब विकास निधि जारी होने के साथ ही सभी विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों में गति आने के आसार हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2020-21 की विकास निधि में से प्रदेश के 71 विधायकों को एक-एक करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है। बता दें कि प्रदेश में विधायकों को पौने तीन करोड़ रुपये की विधायक विकास निधि दी जाती है। लेकिन कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण उपजे आर्थिक हालातों के देखते हुए प्रदेश सरकार ने सभी विधायकों की एक साल की विधायक निधि कोविड फंड में डाल दी। 

लेकिन चुनाव से ठीक डेढ़ साल पहले विधायक निधि पर रोक लग जाने से विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के कई विधायक भी असहज हो गए। कुछ विधायकों ने विधायक निधि के लिए सरकार से खुलकर गुहार लगाई तो कुछ ने बंद कमरों में मंत्रणा कर अपना दुखड़ा सुनाया। उनका कहना था कि उनके पास अपने चुनाव क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए कोई फंड नहीं बचा है। मुख्यमंत्री ने उनकी व्यथा को समझा और सोमवार को विधायक निधि की स्वीकृति प्रदान कर दी।

इस निधि से विधायकों को अपने क्षेत्रों में क्षेत्रीय आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्य करने में मदद मिलेगी। विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों में भी तेजी आएगी।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
 

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