Coronavirus In Uttarakhand: गुरुवार को संक्रमित बुजुर्ग की मौत, 37 नए पॉजिटिव मिले, 2984 पहुंची मरीजों की संख्या
- क्वारंटीन लोगों की निगरानी को दो अफसर तैनात
- प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का 10 प्रतिशत ही उपयोग
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विस्तार
प्रदेश में कोरोना संक्रमित मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को 37 नए कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। वहीं दून मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित 72 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हुई है। प्रदेश में संक्रमित मरीजों की संख्या 2984 पहुंच गई है। जबकि संक्रमण से मरने वालों की संख्या 42 हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार बृहस्पतिवार को आई जांच रिपोर्ट में 1205 सैंपल निगेटिव मिले हैं। आज पौड़ी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और देहरादून में एक-एक केस सामने आया है। वहीं, नैनीताल में 17 और ऊधमसिंह नगर में 16 संक्रमित मामले सामने आए हैं।
नैनीताल जिले में 17 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसमें तीन दिल्ली, 13 लोग संपर्क और एक मरीज की ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है। ऊधमसिंह नगर जिले में 16 संक्रमितों में 5 दिल्ली, 6 नोएडा, एक कुवैत, एक साउथ कोरिया, एक बिजनौर और दो संक्रमित संपर्क में आए हैं।
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देहरादून, अल्मोड़ा, पौड़ी और पिथौरागढ़ जिले में एक-एक संक्रमित मिले हैं। इनकी ट्रेवल हिस्ट्री दिल्ली की है। बृहस्पतिवार को 88 संक्रमित मरीजों को इलाज के बाद घर भेजा गया है। प्रदेश में अब तक ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा 2400 पार कर गया है।
प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने बताया कि प्रदेश में रोजाना संक्रमित मामले मिलने के बाद भी रिकवरी और डबलिंग दर में सुधार हुआ है। प्रदेश की रिकवरी दर 80 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है। वर्तमान में प्रदेश में कोरोना के 510 सक्रिय मामले हैं।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति
जिला संक्रमित ठीक हुए मरीज
अल्मोड़ा 182 158
बागेश्वर 83 72
चमोली 74 62
चंपावत 57 47
देहरादून 713 565
हरिद्वार 315 268
नैनीताल 513 345
पौड़ी 143 93
पिथौरागढ़ 66 61
रुद्रप्रयाग 66 60
टिहरी 420 402
यूएस नगर 277 213
उत्तरकाशी 75 59
कुल - 2984 2405
क्वारंटीन लोगों की निगरानी को दो अफसर तैनात
प्रदेश सरकार ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में होम या केंद्रों में क्वांरटीन किए गए लोगों की निगरानी के लिए दो अफसरों की तैनाती की है। इन दोनों को कॉल सेंटरों के जरिये फोन करके क्वारंटीन हुए लोगों का हाल लेने को भी कहा गया है।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार की ओर से जारी आदेश के तहत आईएएस चंद्रेश यादव और आईपीएस अभिनव कुमार को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इनसे कहा गया है कि शहरी या ग्रामीण क्षेत्र में जहां बात न हो पा रही हो वहां सीआरटी सहित अन्य माध्यमों से संपर्क किया जाए और जांच कराई जाए। हर दिन यह सूचना सचिव स्वास्थ्य और सचिव आपदा प्रबंधन को भी देनी होगी।
मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि जिला स्तर पर इस मामले को लेकर डीएम जिला स्तर के नोडल अधिकारी भी तैनात करेंगे। राज्य नोडल अधिकारियों और जिला प्रशासन से कहा गया है कि बाहर से आने वालों को स्मार्ट सिटी के पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराया जाए। अनलॉक-2 में शासन ने परमिट और अन्य व्यवस्थाएं समाप्त कर दी थी लेकिन पंजीकरण की व्यवस्था को बरकरार रखा था। कहा गया कि बिना पंजीकरण के किसी को प्रवेश नहीं मिलेगा। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण क्षेत्रों में और स्थानीय निकायों को शहरी क्षेत्रों में यह व्यवस्था देखनी होगी।
आदेश में ग्राम और शहर के स्तर पर निकायों को क्वारंटीन केंद्रों और होम क्वारंटीन वालों की निगरानी के लिए स्वयंसेवकों की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। ये स्वयंसेवक कॉलेजों के छात्र, नागरिक संस्थाओं के सदस्य आदि हो सकते हैं। इसके साथ ही आरोग्य सेतु एप डाउनलोड कराने, प्रवासियों की जानकारी देने आदि के लिए भी कहा गया है।
कैंटीन में कोरोना संक्रमित होने की अफवाह से अफरा-तफरी
जानकारी के मुताबिक बृहस्पतिवार सुबह बड़ी संख्या में लोग सीएसडी कैंटीन में सामान की खरीदारी को पहुंचे थे। लेकिन कैंटीन प्रबंधन ने कैंटीन नहीं खोली। लोग कैंटीन के बाहर इंतजार करते रहे।
पाबौ क्षेत्र से आए गुमान सिंह ने बताया कि वह सुबह सात बजे घर से चले थे। बड़ी मुश्किल से वाहन मिला। अब कैंटीन ही नहीं खोली जा रही। पैठाणी क्षेत्र से आईं भूमा देवी ने भी यही बात दोहराई। लोग कैंटीन खोलने में देरी से नाराज थे।
बताया जा रहा है कि इसी बीच किसी ने आरोग्य सेतु एप पर किसी के कोरोना पॉजिटिव आने की अफवाह फैला दी। इससे अफरा-तफरी मच गई। कैंटीन प्रबंधक दिनेश सिंह ने बताया कि कैंटीन में भीड़ बहुत अधिक हो गई थी।
लोगों से शारीरिक दूरी का पालन किए जाने का आग्रह भी किया गया, लेकिन वह नहीं माने। मजबूरन कैंटीन बंद रखनी पड़ी। बताया कि कैंटीन बंद करने की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई थी। शुक्रवार को विधिवत कैंटीन खोल दी जाएगी।
प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का 10 प्रतिशत ही उपयोग
प्रदेश में कोरोना संक्रमित मामलों को लेकर सकारात्मक नतीजे मिलने से सरकार को थोड़ी राहत मिली है। वर्तमान में राज्य की रिकवरी, डबलिंग और सैंपल जांच के आधार पर संक्रमण की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से जितनी स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। उसका अभी तक 10 प्रतिशत ही उपयोग हुआ है। वहीं, रिकवरी दर में उत्तराखंड का देश में पांचवां स्थान है।
त्रिवेंद्र सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए प्रदेश में 24327 आईसोलेशन बेड, 273 आईसीयू और 161 वेंटीलेटर की व्यवस्था की है। लेकिन अभी तक प्रदेश में नौ संक्रमित मरीज आईसीयू और 12 मरीज ऑक्सीजन की जरूरत होने से वेंटीलेटर पर हैं। सरकार ने जिस हिसाब से कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था की है। उसका 10 प्रतिशत ही इस्तेमाल हुआ है। संक्रमित मरीज सामान्य बेड में ही इलाज के बाद ठीक होकर घर जा रहे हैं।
गत एक सप्ताह में प्रदेश में सैंपल जांच के आधार संक्रमण की दर 4.78 प्रतिशत है। जबकि राष्ट्रीय दर 6.63 प्रतिशत है। इसी तरह संक्रमित मामले दोगुने होने की दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। प्रदेेश की रिकवरी दर 78.62 प्रतिशत है। जबकि राष्ट्रीय औसत 59.43 प्रतिशत है। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण पूरी तरह से नियंत्रण में है। सरकार ने संक्रमित मामलों से कई गुना अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की है। प्रदेेश की रिकवरी, डबलिंग और संक्रमण की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। आने वाले समय में उत्तराखंड कोरोना मुक्त प्रदेश के रूप में स्थापित होगा।