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उत्तराखंड में कोरोना: डर और तनाव की वजह से दम तोड़ रहे अधिकतर कोरोना संक्रमित मरीज

Thu, 29 Apr 2021 12:34 PM IST
अलका त्यागी मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 29 Apr 2021 12:34 PM IST
सार

  • इच्छा शक्ति कमजोर होने से दवाओं का अपेक्षाकृत प्रभाव कम हो जाता है। यही कारण है कि कई लोगों के कोरोना संक्रमित होते आते ही कई अंगों के काम न करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। 

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Coronavirus in Dehradun: Mostly Corona Positive patients dying due to fear and stress
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण का प्रसार तेजी से होने के कारण अधिकतर संक्रमित मरीज डर और तनाव से दम तोड़ रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार डर और तनाव से शरीर की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) घटने के अलावा ऑक्सीजन स्तर भी असंतुलित हो जाता है।

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इच्छा शक्ति कमजोर होने से दवाओं का अपेक्षाकृत प्रभाव कम हो जाता है। यही कारण है कि कई लोगों के कोरोना संक्रमित होते ही कई अंगों के काम न करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। 
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं फिजीशियन डॉ. कुमार जी. कॉल और वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जनेंद्र कुमार ने बताया कि गंभीर बीमारी में मन में अगर डर घर कर जाए तो हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर समेत मल्टी ऑर्गन खराब होने की समस्या बढ़ जाती है।

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इससे मुख्य बीमारी को कंट्रोल करने में भी समस्या के साथ दूसरे कारणों से जान की जाने की स्थिति बन जाती है। किसी भी बीमारी की रिकवरी के लिए मरीज की इच्छा शक्ति बहुत महत्वपूर्ण योगदान निभाती है।

बुखार और थकावट जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल विशेषज्ञ को दिखाएं

प्रदेश के मुख्यमंत्री के चिकित्सक एवं राजकीय जिला कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि कोरोना से बचाव के सबसे महत्वपूर्ण दो बिंदु हैं। एक तो जैसे ही बुखार और थकावट जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल विशेषज्ञ को दिखाएं। डॉक्टर शुरुआत में सामान्य बुखार की और अन्य सामान्य दवाएं देते हैं।

उसके बाद भी बुखार नहीं उतरता है और इन्फेक्शन बढ़ता है तो स्टेरॉयड दवाइयां देने की भी जरूरत पड़ती है। आजकल कुछ लोग गूगल पर देख कर दवाओं के साइड इफेक्ट और तमाम चीजों को लेकर भ्रांति पाल लेते हैं। इस तरह से कोई भी व्यक्ति अपने आप डॉक्टर न बने।

डॉक्टर स्थिति ठीक न होने पर खून की जांच, एक्सरे और अन्य जांच करने के बाद ही स्टेरॉयड और अन्य दवाएं देते हैं। साथ ही उन दवाओं के साइड इफेक्ट कम करने के लिए भी दूसरी दवाएं दी जाती हैं। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और अन्य उपचार कराएं। 



दून अस्पताल में कर रहे काउंसिलिंग
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों के अलावा मनोवैज्ञानिक और जनसंपर्क अधिकारियों की टीम अस्पताल के दूसरे कामों के साथ-साथ परिजनों और मरीजों की लगातार काउंसिलिंग कर रहे हैं। मनोवैज्ञानिक निधि काला, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र भंडारी, जनसंपर्क अधिकारी संदीप रावत, गौरव, सचिन, दिनेश रावत, विजय आदि मरीजों और उनके परिजनों की काउंसिलिंग कर रहे हैं। चिकित्सक लोगों से घबराने और भ्रमित न होने की सलाह दे रहे हैं। 

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