उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में 263 नए संक्रमित मिले, सात की मौत, 629 मरीज हुए ठीक
उत्तराखंड में कोरोना की दूसरी लहर काबू में आ गई है। प्रदेश में अब एक्टिव केस की संख्या भी घटकर चार हजार तक पहुंच गई है। वहीं, संक्रमित मरीज और मौत के मामले भी कम होने लगे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 263 नए मामले दर्ज किए गए। वहीं सात मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा 629 मरीजों को आज ठीक होने के बाद घर भेजा गया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, रविवार को 31168 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। वही, अल्मोड़ा में 12, बागेश्वर में 8, चमोली में 11, चंपावत में 11, देहरादून में 67, हरिद्वार में 55, नैनीताल में 23, पौड़ी में नौ, पिथौरागढ़ में पांच, रुद्रप्रयाग में पांच, टिहरी में 20, ऊधमसिंह नगर में 15 और उत्तरकाशी में 22 मामले सामने आए हैं।
अमर उजाला टीका ही बचाएगा अभियान: छोड़ो चिंता मन से भया भगाओ, कोरोना का टीका लगवाओ
प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल मामलों की संख्या तीन लाख 36 हजार 879 हो गई है। इनमें से तीन लाख 19 हजार 559 लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 4633 पहुच गई है। राज्य में कोरोना के चलते अब तक चुल 6935 लोगों की जान जा चुकी है।
अचानक दून अस्पताल पहुंचे सीएम, निर्माण कार्य में देरी पर जताई नाराजगी
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत रविवार दोपहर अचानक दून अस्पताल पहुंच गए। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नए ओपीडी भवन और ऑपरेशन थिएटर बिल्डिंग में निर्माण कार्य लंबे समय से पूरा न होने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल्द से जल्द निर्माण कार्यों को पूरा करें। ताकि मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी न हो।
कार्य में कोताही बरतने वालों के खिलाफ मुख्यमंत्री ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। मुख्यमंत्री ने कोरोना और अन्य बीमारियों के मरीजों के इलाज में जुटे डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य की सराहना करते हुए उनकी पीठ थपथपाई। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत, निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार भी मौजूद रहे।
ऋषिकेश एम्स निदेशक की बहन का कोरोना से निधन
एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रोफेसर रविकांत की बड़ी बहन प्रोफेसर डा. शशि प्रतीक (71) का बीते शनिवार को एम्स में निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार वे कोविड संक्रमित थीं। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। एम्स ऋषिकेश में उनका उपचार चल रहा था।
एम्स निदेशक प्रो.रविकांत ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए बताया कि चंद्रेश्वरनगर घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र आदित्य ने उन्हें मुखाग्नि दी। उन्होंने बताया कि प्रो. शशि प्रतीक पूर्व में वर्धमान मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली में स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष रह चुकी हैं।
वे लंदन और सिडनी से चिकित्सा प्रशिक्षित थीं, उन्होंने विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद अपने देश के लोगों की चिकित्सा सेवा का रास्ता चुना व आजीवन लोगों को सेवाएं दी।
उन्होंने कहा वे यूपी के अपने गृह जनपद मुजफ्फरनगर के आसपास के गांवों से पहली महिला चिकित्सक रही हैं। उनके पति प्रो. केपीएस मलिक जाने माने नेत्र विशेषज्ञ हैं। उनकी पुत्री कोकिल केलिफोर्निया और पुत्र पेरिस से सप्ताहभर पहले ही यहां आए थे।
15 सौ से अधिक दिव्यांगों को घर पर लगाई कोरोना की पहली डोज
चलने फिरने में असमर्थ 15 सौ से अधिक दिव्यांगजनों को घर पर कोरोना की पहली डोज लगाई जा चुकी है। समाज कल्याण विभाग के जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र व स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिव्यांगजनों के लिए डोर टू डोर के टीकाकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी हेमलता पांडेय ने बताया कि अभी तक अभियान के तहत 1550 से अधिक दिव्यांगजनों को कोरोना टीके की पहली डोज लगाई जा चुकी है। चार दिन तक जिले भर में दिव्यांगजनों के लिए टीकाकरण कैंप का आयोजन किया जाएगा।
14 से 19 जून तक विभिन्न जगहों में आयोजित होने वाले टीकाकरण कैंप में सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से दिव्यांगजनों को टीका लगाया जाएगा। कैंप के दौरान दिव्यांगजनों को बीमारी से बचने और कोरोना गाइडलाइन का पालन करने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।