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Dehradun News: मिश्रित आबादी पर तकरार, रिहायशी बस्तियों का दखल से इनकार
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एमडीडीए ने मास्टर प्लान-2041 में मिश्रित क्षेत्र का विस्तार कर आवासीय कॉलोनियों के अंदर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की छूट दे दी है। लेकिन, दून रेजिडेंट वेलफेयर फ्रंट समेत कई संगठन इसके विरोध में आ गए हैं। इसे लेकर आपत्ति दर्ज कराई जा रही है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की छूट मिलने से इन इलाकों की शांति में खलल पड़ेगा।
मास्टर प्लान में मिश्रित क्षेत्र को बढ़ाकर 9.33 फीसदी कर दिया गया है। यह करीब 37,800 हेक्टेयर बैठता है। इतने बड़े हिस्से को मिश्रित क्षेत्र घोषित करने से इन इलाकों में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल कहते हैं कि आवासीय क्षेत्रों में बगैर स्थानीय लोगों की राय लिए ऐसा कदम नहीं उठाया जा सकता। जिन लोगों ने खासतौर पर शांति और सुकून के लिए अपने मकान आवासीय इलाकों में बनाए हैं, उनके साथ इस तरह का कदम ज्यादती है।
एमडीडीए को इस पर विचार करना चाहिए। वहीं, दून रेजिडेंट वेलफेयर फ्रंट ने इस कदम को गलत करार दिया है। शहर की 59 रेजिडेंट सोसायटी भी फ्रंट के साथ हैं। दून रेजिडेंट वेलफेयर फ्रंट के सेक्रेटरी सरदार मोंटी कोहली कहते हैं कि रिहायशी कॉलोनियों में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होने दी जाएंगी। एमडीडीए की मनमानी बरदाश्त नहीं होगी।
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62 सड़कों को घोषित किया था व्यावसायिक
अब तक लागू मास्टर प्लान (संशोधित)-2013 के बारे में कहा जाता है कि इसकी कोई किताब तक जारी नहीं की गई। इस मास्टर प्लान में बिना किसी सर्वे के शहर की 62 सड़कों को व्यावसायिक घोषित कर दिया गया। जबकि, ऐसा करने से पहले फिजिकल सर्वे किया जाना चाहिए था। इस मास्टर प्लान में जोन निर्धारित नहीं किए गए थे। जबकि, धारा 8 (1) के तहत यह आवश्यक है। बताया जाता है कि 2014 में पुराने मास्टर प्लान यानी 2008 के मास्टर प्लान से जोन कॉपी करके गलत तरीके से इसमें डाल दिए गए।
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मास्टर प्लान 311 पेज का है। अंग्रेजी के इस प्रारूप को आम आदमी समझ नहीं पा रहा तो अपनी राय कैसे देगा। एमडीडीए को मास्टर प्लान समझाने के लिए आम नागरिकों को आमंत्रित करना चाहिए। कोई कार्यशाला आदि का आयोजन हो ताकि लोग अपनी राय दें सकें।
-अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, एसडीसी फाउंडेशन
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फंसेगा नक्शे का पेच
मिश्रित आबादी में सबसे बड़ा पेच व्यावसायिक नक्शे पास कराने का आएगा। बेशक एमडीडीए कई इलाकों को मिश्रित आबादी घोषित कर दे लेकिन इन इलाकों में आवासीय क्षेत्र होने के कारण सड़कों की चौड़ाई अपेक्षाकृत कम है। लिहाजा यहां व्यावसायिक नक्शा पास नहीं हो सकेगा।
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देहरादून की सड़कों पर पहले से ही मिश्रित आबादी है। उन्हीं इलाकों को मिश्रित आबादी घोषित किया जाएगा, जहां धरातल पर मिश्रित आबादी है। विशुद्ध आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
-बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष, एमडीडीए
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मास्टर प्लान में मिश्रित क्षेत्र को बढ़ाकर 9.33 फीसदी कर दिया गया है। यह करीब 37,800 हेक्टेयर बैठता है। इतने बड़े हिस्से को मिश्रित क्षेत्र घोषित करने से इन इलाकों में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल कहते हैं कि आवासीय क्षेत्रों में बगैर स्थानीय लोगों की राय लिए ऐसा कदम नहीं उठाया जा सकता। जिन लोगों ने खासतौर पर शांति और सुकून के लिए अपने मकान आवासीय इलाकों में बनाए हैं, उनके साथ इस तरह का कदम ज्यादती है।
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एमडीडीए को इस पर विचार करना चाहिए। वहीं, दून रेजिडेंट वेलफेयर फ्रंट ने इस कदम को गलत करार दिया है। शहर की 59 रेजिडेंट सोसायटी भी फ्रंट के साथ हैं। दून रेजिडेंट वेलफेयर फ्रंट के सेक्रेटरी सरदार मोंटी कोहली कहते हैं कि रिहायशी कॉलोनियों में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होने दी जाएंगी। एमडीडीए की मनमानी बरदाश्त नहीं होगी।
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62 सड़कों को घोषित किया था व्यावसायिक
अब तक लागू मास्टर प्लान (संशोधित)-2013 के बारे में कहा जाता है कि इसकी कोई किताब तक जारी नहीं की गई। इस मास्टर प्लान में बिना किसी सर्वे के शहर की 62 सड़कों को व्यावसायिक घोषित कर दिया गया। जबकि, ऐसा करने से पहले फिजिकल सर्वे किया जाना चाहिए था। इस मास्टर प्लान में जोन निर्धारित नहीं किए गए थे। जबकि, धारा 8 (1) के तहत यह आवश्यक है। बताया जाता है कि 2014 में पुराने मास्टर प्लान यानी 2008 के मास्टर प्लान से जोन कॉपी करके गलत तरीके से इसमें डाल दिए गए।
मास्टर प्लान 311 पेज का है। अंग्रेजी के इस प्रारूप को आम आदमी समझ नहीं पा रहा तो अपनी राय कैसे देगा। एमडीडीए को मास्टर प्लान समझाने के लिए आम नागरिकों को आमंत्रित करना चाहिए। कोई कार्यशाला आदि का आयोजन हो ताकि लोग अपनी राय दें सकें।
-अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, एसडीसी फाउंडेशन
फंसेगा नक्शे का पेच
मिश्रित आबादी में सबसे बड़ा पेच व्यावसायिक नक्शे पास कराने का आएगा। बेशक एमडीडीए कई इलाकों को मिश्रित आबादी घोषित कर दे लेकिन इन इलाकों में आवासीय क्षेत्र होने के कारण सड़कों की चौड़ाई अपेक्षाकृत कम है। लिहाजा यहां व्यावसायिक नक्शा पास नहीं हो सकेगा।
देहरादून की सड़कों पर पहले से ही मिश्रित आबादी है। उन्हीं इलाकों को मिश्रित आबादी घोषित किया जाएगा, जहां धरातल पर मिश्रित आबादी है। विशुद्ध आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
-बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष, एमडीडीए