गंगा में अस्थि विसर्जन और जलसमाधि को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री का विवादित बयान, पढ़िए क्या बोले
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केंद्रीय जल संरक्षण, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय में राज्य मंत्री डा. सत्यपाल सिंह ने गंगा में अस्थि विसर्जन और जलसमाधि को लेकर बड़ा बयान दे दिया।
उनका कहना है कि, का कहना है कि गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए अस्थियों के विसर्जन और जलसमाधि जैसी धार्मिक प्रथाओं पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने देश के धर्माचार्यों और धर्मगुरुओं से अपील की कि वे गंगा को निर्मल बनाने में अपने स्तर पर भी पहल करें।
केंद्रीय राज्य मंत्री मंगलवार को हरिद्वार ऋषिकुल में नमामि गंगे योजना के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत स्वीकृत 918.937 करोड़ की लागत से प्रस्तावित 32 योजनाओं के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
डा. सत्यपाल ने कहा कि अस्थियों के विसर्जन, साधु संतों के जलसमाधि लेने या फिर फूल अर्पित करने की वजह से भी गंगा प्रदूषित हो रही हैं। गंगा में अस्थियों का विसर्जन कतई शास्त्रसम्मत नही है।
अंधविश्वासों को दरकिनार कर गंगा निर्मल करने में मदद मिलेगी
गंगा पर देश के 40 करोड़ लोगों को जीवन आश्रित है और ऐसे में यदि गंगा विलुप्त हो गई तो करोड़ों लोगों के जीवन पर संकट खड़ा हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गंगा की पवित्रता को नष्ट करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके, इसके लिए बिल का ड्राफ्ट तैयार है। इसे जल्द ही संसद में लाया जाएगा।
गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने में विदेशों में बसे भारतीय उद्यमियों की भी मदद ली जाएगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार गंगा को निर्मल बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
तमाम धार्मिक अंधविश्वासों को दरकिनार कर गंगा को पूरी तरह निर्मल करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने के बजाय उसे जमीन में दफनाकर उस पर वृक्ष लगाए जाएं, आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिलेगा।
सीएम रावत ने राज्य के लिए एक हजार करोड़ की योजनाओं को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। कार्यक्रम को शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, वित्त मंत्री प्रकाश पंत, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, सांसद रमेश पोखरियाल निशंक आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में विधायक यतीश्वरानंद, सुरेश राठौर, संजय गुप्ता आदि उपस्थित थे।