संविधान सभा सदस्य जिसने ठुकरा दिया पाक PM बनने का प्रस्ताव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संविधान दिवस पर बृहस्पतिवार को मंगलौर में सैय्यद मोहम्मद अहमद काजमी को याद किया गया। वह न सिर्फ आजाद भारत में पहली लोकसभा के सदस्य चुने गए थे, बल्कि ला ग्रेजुएट होने के साथ संविधान बनाने वाली असेंबली के सदस्य रहे थे।
जिन्ना ने खुद दिया था प्रस्ताव
उनकी भतीजी जमशीदा काजमी के पुत्र गुलाम जिलानी के अनुसार सय्यद मोहम्मद अहमद काजमी को विभाजन के समय मोहम्मद अली जिन्ना की ओर से पाक के पीएम पद का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने कुबूल नहीं किया और भारत को ही वरीयता दी। भले ही उनका जन्म पुरकाजी में हुआ हो, लेकिन उनका बचपन मंगलौर में ही बीता और यहीं पर उनका इंतकाल भी हुआ था।
27 जून 1892 को जन्मे काजमी अलीगढ़ व इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़कर ला ग्रेजुएट हुए। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी की।
शरियत लॉ एक्ट, वक्फ एक्ट जैसे एक्ट मंजूर कराए
1934 से 1945 तक सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेंबली के सदस्य रहने के बाद 1949 से 50 तक संविधान सभा के सदस्य रहे। देश का संविधान बनाने में उन्होंने भी योगदान दिया। 1950 से 52 तक वह प्रोविजनल पार्लियामेंट के सदस्य रहे।
काजमी ने लोकसभा सदस्य के तौर पर वक्फ एक्ट, इस्लामिक शरियत लॉ एक्ट जिसे काजमी एक्ट के नाम से भी जाना जाता है, जैसे एक्ट मंजूर कराए।
गरीबों और मुस्लिमों की शिक्षा के लिए काम
पहली बार वह उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर व फैजाबाद सीट से कांग्रेस के टिकट पर लोक सभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने गरीबों व मुस्लिमों की शिक्षा के लिए काफी काम किए। क्षेत्रवासी अमजद काजमी और काजी अलीम का कहना है कि देश के लिए सय्यद मोहम्मद अहमद काजमी का योगदान भुलाया नहीं जा सकता है।