कांग्रेस कार्यकर्ता ने मांगी लालबत्ती, वजह भी तो जानिए
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आप लोगों ने अदनान सामी का मशहूर गाना सुना होगा। मौला! मुझको भी तो लिफ्ट करा दे, ऐसे-वैसों को दिया है, कैसों-कैसों को दिया है, मुझको भी...’। उसी तर्ज पर कांग्रेस के एक मामूली कार्यकर्ता भैरव सिंह बोरा ने अपने मौला (मुख्यमंत्री) से पत्र लिखकर लालबत्ती की गुहार लगाई है।
उनकी मांग है कि सरकार गरीब कोटे से उन्हें दर्जा मंत्री बनाएं। दलील है कि ऐसा कर कांग्रेस सरकार की गरीबों के प्रति हमदर्दी का इजहार हो सकेगा। उत्तराखंड के चंपावत से करीब 41 किमी दूर कठौल (चल्थी) गांव के भैरव सिंह बोरा का कहना है कि दो दशक से अधिक वक्त तक कांग्रेस के लिए काम किया है, लेकिन उनकी लगातार अनदेखी हुई। कभी कोई दायित्व नहीं दिया गया।
इसमें उनकी कमजोर माली हालत आड़े आई। बस कांग्रेस सरकार से बीमार होने पर उन्हें एक बार पांच हजार रुपए की राहत राशि मिली। मछली बेचने के अलावा मजदूरी से गुजारा करने वाले 51 साल के बोरा कहते हैं कि दर्जा राज्य मंत्री बनाए जाने से चल्थी और आसपास के क्षेत्र का विकास भी हो सकेगा।
इस पिछड़े इलाके में शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली, सड़क के मुद्दों को अधिक दमदार तरीके से उठाया जा सकेगा। साथ ही पार्टी में गरीब कार्यकर्ताओं का भी मनोबल बढ़ेगा। बताते चलें कि जिले में एक ठेकेदार कार्यकर्ता ने तो सीएम के दौरे के दौरान लालबत्ती के लिए समर्थकों के जरिए दबाव बनवाया था।
इन्हें तो धरने के बाद भी नहीं मिली लालबत्ती
घरबार छोड़ जिंदगी के 35 साल कांग्रेस में लगाने के बाद भी प्रकाश खर्कवाल को लाल बत्ती नहीं मिल सकी। इसके लिए उन्होंने 2005 में देहरादून में धरना भी दिया।
तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी ने खुद धरना तुड़वाया, लेकिन लालबत्ती फिर भी नहीं मिली। केवल मामूली आर्थिक सहायता दी गई। निष्ठावान कार्यकर्ता रहे खर्कवाल ने पार्टी के लिए घर-द्वार ही नहीं छोड़ा, बल्कि बच्चों से भी अक्सर दूर रहे। मौजूदा समय में भी वे दिल्ली में रहकर कांग्रेस की सेवा में लगे हैं।
बुटिक सेंटर चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रही उनकी पत्नी आशा से जब पति की कांग्रेस निष्ठा के बारे में पूछा गया, तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। कहती हैं कि कांग्रेस के प्रति उनकी निष्ठा से परिवार को क्या-क्या नहीं झेलना पड़ा। घर का सामान बेचकर भी पार्टी के लिए काम किया। वे जिंदगी भर कांग्रेस की सेवा में लगे रहे और मुझे परिवार के भरण-पोषण की जंग लड़नी पड़ी।