हरीश रावत की 'नाक में दम' करने को फिर तैयार बागी विधायक
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उत्तराखंड में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए 10 विधायक आने वाले समय में भी हरीश रावत सरकार और कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी करते रहेंगे।
एक ओर मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी सरकार को मजबूती और विस्तार देने के लिए दिल्ली आए थे, वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ये 10 विधायक भी मंगलवार को दिल्ली में डटे हुए थे। दिल्ली के अशोक होटल में इन्हीं 10 विधायकों की मुलाकात प्रदेश भाजपा प्रभारी श्याम जाजू और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल से हुई।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए विधायकों का इस्तेमाल पार्टी घर के भेदी के तौर पर करना चाहती है। इन विधायकों को दिल्ली बुलाकर बैठक करने का मकसद भी यही था कि उत्तराखंड की लड़ाई अब किस तरह से लड़ी जाए, इस पर मंथन करना है। भाजपा की इस मशक्कत से साफ है कि उत्तराखंड में भाजपा को कहीं न कहीं अपने योद्धाओं में विश्वास और दम नहीं दिख रहा है।
कार्यक्रम इन्हीं योद्धाओं को आगे करके BJP लड़ेगी लड़ाई
नई रणनीति के तहत कांग्रेस से निपटने के लिए इन्हीं मेहमान विधायकों की मदद ली जा रही है। केंद्रीय मंत्री और प्रदेश प्रभारी से हुई मुलाकात में प्रदेश का कोई भी नेता शामिल नहीं किया गया।
भाजपा में आने के बाद ये विधायक अपने को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं और उत्तराखंड भाजपा के ढुलमुल रवैये से इन्हें सरकार के खिलाफ चल रही लड़ाई हारती हुई दिख रही है। इन विधायकों ने भाजपा नेताओं से स्पष्ट तौर पर कहा है कि बिना आक्रामक हुए हम उत्तराखंड में खुद को स्थापित नहीं कर सकते हैं।
ये तय है कि भाजपा भी कहीं न कहीं अपनी अगली लड़ाई और कार्यक्रम इन्हीं योद्धाओं को आगे करके लड़ेगी। बैठक में हरक सिंह रावत, विजय बहुगुणा, सुबोध उनियाल, डा. सुरेंद्र मोहन सिंघल, अमृता रावत, रेखा आर्य, शैलारानी रावत, कुंवर प्रणव चैंपियन, उमेश शर्मा काऊ और प्रदीप बत्रा मौजूद थे।