राहुल 'राज' आते ही अहम पदों को लेकर कांग्रेसियों में मची खलबली, फ्रंट में ये चार दिग्गज
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राष्ट्रीय कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथों में आने के बाद प्रदेश कांग्रेस के हलकों में ये सवाल गरमा रहा है कि अब उनके दरबार में प्रदेश के किस नेता का सिक्का चलेगा।
विधानसभा चुनाव से पूर्व तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल ने जहां पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर ज्यादा भरोसा किया वहीं गांधी परिवार ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को भी भरपूर समर्थन दिया। दस जनपथ के इसी भरोसे के दम पर किशोर ने संगठन को अपने हिसाब से चलाने की कोशिश की।
मगर विस चुनाव में कांग्रेस की करारी शिकस्त के बाद परिस्थितियां बदली। अप्रत्याशित ढंग से किशोर प्रदेश अध्यक्ष पद से विदा हुए और उनकी जगह प्रीतम सिंह को लाया गया। वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के पास कोई सांगठनिक जिम्मेदारी नहीं है।
दोनों अनुभवी नेता प्रदेश की सियासत में सक्रिय हैं। दोनों को आलाकमान के नजदीक माना जाता है। लेकिन बदले सियासी हालातों में क्या दोनों दिग्गजों का राहुल के दरबार में सिक्का चलेगा ? सियासी हवाओं में जो चर्चाएं तैर रही हैं, उनमें हरीश रावत के बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें राहुल गांधी की टीम में जगह मिल सकती है।
आलाकमान को प्रदेश अध्यक्ष के नाम का एलान करना है। ये नाम प्रीतम सिंह का होना तय माना जा रहा है। राहुल के अध्यक्ष बनने पर प्रीतम कहते हैं कि कांग्रेस उनकी रहनुमाई में चुनौतियों से पार पा लेगी।
पढ़िए क्या बोले दिग्गज
अध्यक्ष होने के नाते प्रीतम और नेता प्रतिपक्ष होने के नाते डॉ. इंदिरा हृदयेश का पार्टी आलाकमान के नजदीक होना स्वाभाविक है। लेकिन ये आने वाला समय बताएगा कि प्रदेश में कांग्रेस की दशा सुधारने और दिशा देने में पार्टी आलाकमान हरीश रावत और किशोर उपाध्याय की क्या भूमिका तय करता है? जल्द यह भी पता चल जाएगा, राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से प्रदेश संगठन में युवाओं को कितना महत्व मिलेगा? बहरहाल, पार्टी के ये सारे दिग्गज राहुल की रहनुमाई में कांग्रेस का पतझड़ खत्म होने की उम्मीद कर रहे हैं।
राहुल जी के अध्यक्ष बनने की कांग्रेस में बहुत प्रसन्नता है। सभी लोकतांत्रिक ताकतें भी उत्साहित है। गुजरात में परिवर्तन के संकेत हैं। उनके सामने कुछ प्रमुख चुनौतियां हैं। जनता ने उन्हें विपक्ष के गंभीर नेता के रूप में स्वीकारा है। इस छवि को और ऊंचा उठाना है। उनके समक्ष कांग्रेस से बाहर लोकतांत्रिक ताकतों को साथ लेकर चलने की चुनौती है।
-हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री
राहुल गांधी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। वह लंबे समय से एक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहे हैं। देश के युवाओं की प्रेरणा हैं। उनके अध्यक्ष बनने के बाद युवाओं में भारी उत्साह है। पुराने लोगों के अनुभव और नए युवाओं के जोश से पार्टी उनके नेतृत्व में आगे बढ़ेगी।
-डॉ. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
राहुल गांधी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। कांग्रेस को मजबूत करने की जिम्मेदारी केवल राहुल गांधी पर नहीं है। अब यह जिम्मेदारी उन सभी की है जिन्होंने उन्हें अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया। राहुल जी के नेतृत्व में कांग्रेस का बसंत शुरू हो चुका है और मोदी-शाह का पतझड़ आने लगा है।
- किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस