उत्तराखंड की इस सीट को तवज्जों नहीं दे रहे कांग्रेस आलाकमान
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हरिद्वार संसदीय क्षेत्र के लंढौरा से कांग्रेस की सतत विकास संकल्प यात्रा का आगाज उतना जोरदार नहीं माना जा रहा है। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर कसक है कि भाजपा की तरह कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने उसकी यात्रा को उतनी तरजीह नहीं दी।
कांग्रेस आलाकमान के अभी तक के रुख से यही माना जा रहा है कि यात्रा का दारोमदार मुख्यमंत्री हरीश रावत के कंधों पर डालने की तैयारी है। हालांकि पार्टी संगठन से जुड़े सूत्र दावा कर रहे हैं कि रणनीति और सांगठनिक कार्ययोजना की दृष्टि से पार्टी जल्द ही ‘टॉप गेयर’ में नजर आएगी।
विधानसभा चुनाव में अपने-अपने पक्ष में महौल बनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस यात्रा पर निकल गई हैं। लेकिन शुरुआती चरण में भाजपा की रफ्तार ज्यादा तेज है और उसने कांग्रेस को काफी पीछे छोड़ दिया है।
कांग्रेस ने चुनावी यात्रा की शुरुआत हरिद्वार संसदीय क्षेत्र के लंढ़ौरा से जरूर की, लेकिन इसमें गांधी परिवार के किसी सदस्य ने शिरकत करना जरूरी नहीं समझा।
सियासी हवाओं में ये सवाल तैर रहा है कि यूपी में घूम रहे कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी उत्तराखंड को लेकर उतने गंभीर क्यों नजर नहीं आ रहे हैं? जबकि मोदी के बाद देश के दूसरे सबसे ताकतवर नेता अमित शाह पार्टी की सत्ता परिवर्तन यात्रा का शंखनाद करने देहरादून पहुंचे।
उत्तराखंड आएंगे कांग्रेस के हैवीवेट नेता
राज्य के छोटे-छोटे नगरों और कस्बों में भाजपा के केंद्रीय नेताओं और मंत्रियों को झोंक दिए जाने से कांग्रेसियों की पेशानी पर बल हैं । वे अब तक अंधेरे में हैं कि उनकी सतत विकास यात्रा के दौरान होने वाली 70 से अधिक जनसभाएं करने केंद्र से कौन-कौन हेवीवेट नेता आ रहे हैं। हालांकि पार्टी की मानें तो केंद्रीय नेताओं की एक सूची तैयार कर ली गई है, जिनमें राहुल-प्रियंका के नाम भी शामिल हैं। लेकिन अब तक सूची तय न हो पाने का पार्टी में किसी भी नेता के पास कोई तार्किक जवाब नहीं है।
सवाल तैर रहा है कि जब सूची तैयार है तो नाम फाइनल होने में देरी क्यों हो रही है? मजबूरी में पार्टी को यात्रा की कामयाबी का जिम्मा सरकार के मंत्रियों को देना पड़ा है। मंत्रियों और विधायकों को दी जा रही तरजीह से पार्टी के कई पदाधिकारी असहज हैं। उन्हें मंत्रियों को तवज्जो देना फूटी आंख नहीं सुहा रहा है। देरी आलाकमान की ओर से हो रही है।
पिछले चुनाव में चार महीने पहले ही डॉ. इंदिरा हृदयेश को घोषणा पत्र समिति की कमान सौंपी दी गई थी । प्रचार एवं प्रकाशन समिति का गठन भी पहले कर दिया गया था। इलेक्शन से दो महीने पहले चुनाव अभियान समिति बना दी गई थी। मगर इस बार इन महत्वपूर्ण समितियों का कुछ अता-पता नहीं है।
उधर,पार्टी नेताओं का हाल ये है कि टिकट की दावेदारी पक्की करने के लिए वे समर्थकों की खूब भीड़ जुटा रहे हैं, लेकिन जब पार्टी कार्यक्रम कर रही है तो उनके समर्थक नदारद हैं। पार्टी के एक नेता की मानें तो कांग्रेस टुकड़ों में बंटी है, हर नेता अपनी-अपनी कांग्रेस चला रहा है। ऐसी चुनौतियां बेशक दूसरे दलों में भी है, लेकिन कांग्रेस में ये ज्यादा बड़ी बाधा है। यात्रा की कामयाबी के लिए वे आलाकमान की सक्रियता और पार्टी कार्यकर्ताओं की एकजुटता को जरूरी मान रहे हैं।