महिला उत्पीड़न के मामले में फंसे कांग्रेसी नेता धस्माना की बढ़ेगी मुश्किलें, पुलिस जांच के निर्देश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना पर एक महिला को बच्चों समेत बंधक बनाने के कथित आरोपों की जांच महिला पुलिस अधिकारी करेंगी। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को एसएसपी देहरादून को यह आदेश दिए।
इस मामले में कथित पीड़िता के पति ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को दिए शिकायती पत्र में पुलिस महानिदेशक पर आरोपी कांग्रेस नेता पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था। इधर, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष धस्माना ने कहा कि यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है, वह हर जांच का सामने करने को तैयार हैं।
हरियाणा के पलवल निवासी एक व्यक्ति ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग में शिकायत की थी कि देहरादून में रहने वाली उसकी पत्नी और बच्चों को कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कैद कर रखा है।
अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया कि एसएसपी देहरादून को कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना पर लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच किसी महिला अधिकारी से कराने के आदेश दिए गए हैं। दून पुलिस शिकायकर्ता के आरोपों की पहले भी जांच कर चुकी है, लेकिन आरोपों में कोई दम नहीं मिला है।
पुलिस मुख्यालय के ई-मेल पर शिकायत प्राप्त हुई है, जिसमें कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना पर कतिपय आरोप लगाए गए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार को आरोपों की जांच करने को लिखा गया था।
-अनिल कुमार रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक
हर जांच का सामना करने को तैयार
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि वह तो शिकायतकर्ता अथवा उनके परिवार के किसी सदस्य को जानते तक नहीं है। वह खुद हैरत में है कि उन पर इस तरह के आरोप किसके इशारे पर लगाए गए हैं। उन्होंने खुद डीजीपी से बात पूरे मामले की जांच कराने को कहा है, ताकि यह तो साफ हो सके कि इस साजिश के पीछे कौन है। वह तो हर जांच का सामने करने को तैयार है।
एक साल से फरार घोषित है शिकायतकर्ता
अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया कि शिकायतकर्ता रेलवे विभाग से बर्खास्त है और उसके खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से एक मुकदमा शहर कोतवाली क्षेत्र का है। इस मामले में कोर्ट में पेश न होने के कारण 18 नवंबर 2017 को शिकायतकर्ता को फरार घोषित किया गया था, तब से पुलिस उसकी तलाश में है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली से मिले पत्र के आधार पर प्रमुख सचिव गृह को गंभीर आरोपों की जांच करने को लिखा गया है। पत्र में डीजीपी अनिल कुमार रतूडी और सूर्यकांत धस्माना को आरोपित करते हुए लिखा गया है कि राजनैतिक दबाव में अनिल रतूडी द्वारा शिकायतकर्ता की पत्नी और उनके बेटे की न्यायिक मेडिकल जांच नहीं करा रहे हैं। आरोपाें की जांच किस स्तर पर कराई जाएगी, इसका फैसला गृह विभाग को लेना है।
उषा नेगी, अध्यक्ष राज्य बाल संरक्षण आयोग