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उत्तराखंड की बड़ी आवाज थे जेपी पांडे, राज्य बनने के बाद में भी संघर्ष से रखा अपना नाता 

Tue, 12 Nov 2019 08:14 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजेश शर्मा , अमर उजाला, हरिद्वार
राजेश शर्मा , अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 12 Nov 2019 08:14 AM IST
सार

  • हरिद्वार को उत्तराखंड में शामिल करने के लिए चार साल दिया धरना

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congress leader JP Pandey was great voice of Uttarakhand state
जेपी पांडेय - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

सड़क हादसे में मौत का शिकार हुए राज्य आंदोलनकारी तथा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव जेपी पांडे संघर्ष का जीता जागता नाम थे। राज्य गठन से पहले और उसके बाद भी उन्होंने संघर्ष की अपनी आग को कभी बुझने नहीं दिया।

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जब राज्य गठन नहीं हुआ था, तब पूरे उत्तराखंड क्षेत्र में दहक रही राज्य गठन की मांग को लेकर जिन चुनिंदा लोगों ने हरिद्वार में आंदोलन की लौ जलाई थी, उनमें सबसे आगे जेपी पांडे का ही नाम था। राज्य आंदोलन के समय उत्तराखंड क्रांति दल सर्वमान्य संगठन था।
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संगठन के जिलाध्यक्ष सतीश जोशी के साथ जेपी पांडे उत्तराखंड क्रांति दल के  जिला महामंत्री हुआ करते थे। अलग उत्तराखंड राज्य बनाने और उसमें हरिद्वार को शामिल करने की मांग को लेकर उन्होंने करीब चार साल तक लगातार सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर धरना दिया।  

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उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन को धार देने के लिए संघर्ष समिति बनाई

देश में उत्तराखंड को लेकर कहीं भी कोई रैली, प्रदर्शन, सभा और सेमीनार हुआ, पांडे हर जगह उत्तराखंड की बात रखने के लिए पहुंचे। श्रीयंत्र टापू से लेकर खटीमा, मसूरी या अन्य जहां कहीं आंदोलन हुए वह पहुंचे।

जब उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन को धार देने के लिए संघर्ष समिति का गठन किया गया, तब धीरेंद्र प्रताप आदि नेताओं के साथ जेपी पांडे ने फ्रंट फुट पर आकर आंदोलन को धार दी। राज्य गठन के बाद बहुत सारे नेताओं ने सत्ता का स्वाद चखा, लेकिन जेपी पांडे संघर्ष की पहचान बने रहे।

हालांकि बाद में संगठन के पदाधिकारियों से मतभेद हुआ तो उन्होंने अपना अलग संगठन बना लिया। करीब दो दर्जन संगठनों का अपने स्तर पर ही संचालन करते थे।  

बड़ी धूमधाम से दीपावली के रूप में राज्य का स्थापना दिवस मनाया

शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने, राज्य आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण कराने, उन्हें पेंशन दिलाने तो कभी इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा लगाने की मांग को लेकर वह आंदोलनरत रहे।

हरिद्वार में गरीबों को अतिक्रमण के नाम पर उजाड़े जाने के विरोध का मसला रहा हो या लक्सर और खानपुर के खादरवासियों की समस्याओं का निराकरण, जेपी पांडे की बुलंद आवाज हर जगह सुनाई दी। तीन दिन पहले नौ नवंबर को भी उन्होंने अपने साथियों के साथ बड़ी धूमधाम से दीपावली के रूप में राज्य का स्थापना दिवस मनाया।

हालांकि जेपी पांडे के समर्थकों का ऐसा मानना है कि राज्य गठन के बाद जिस तरह का सम्मान जेपी पांडे को कांग्रेस के नेताओं की ओर से मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। राज्य आंदोलनकारी डॉ. प्रदीप जोशी ने जेपी पांडे के निधन को अपूरणीय क्षति बताया।

चंडीघाट के पास है जेपी पांडे के नाम से बस्ती 

करीब 40 साल से जेपी पांडे के साथी रहे हरिद्वार प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष गोपाल सिंह रावत ने बताया कि युवावस्था से ही जेपी पांडे में संघर्ष का अलग जज्बा था। भाजपा के जिला मंत्री राजीव भट्ट का कहना है कि जेपी पांडे उत्तराखंड की बड़ी आवाज थे। उनके निधन से बड़ा झटका लगा है।

गरीबों के लिए लड़ने की अपनी पहचान बनाने वाले जेपी पांडे के नाम से चंडीघाट के पास एक बस्ती बसी हुई है। करीब दस साल पहले इस बस्ती का नाम जेपी पांडे बस्ती रखा गया था। बस्ती के नामकरण के बारे में पांडे ने खुद ही एक बार बताया था कि बार-बार प्रशासन गरीबों की झुग्गियों को अतिक्रमण बताकर हटवा देता था उन्हें संरक्षण देने के लिए लोगों की सलाह पर बस्ती का नामकरण किया गया था। 

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