उत्तराखंड: चंपावत उपचुनाव से पूर्व कांग्रेसी नेता भाजपा में शामिल, सीएम धामी ने पार्टी का पटका पहनाकर किया स्वागत
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि चंपावत उपचुनाव में सीएम धामी के सामने कांग्रेस दमदार चेहरे को उतारने से कतरा रही थी या उसके बड़े नेताओं ने मैदान में उतरने से मना कर दिया। यह सीएम का खौफ है कि पूर्व विधायक ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।
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मीडिया प्रभारी महेश चंद समेत कांग्रेसी नेता भाजपा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें भाजपा का पटका पहनाकर स्वागत किया। शनिवार को देहरादून में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कांग्रेस से जुड़े लोगों ने भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।
इनमें कांग्रेस के 35 साल पुराने कार्यकर्ता महेश चंद के साथ बनबसा के प्रधान राकेश चंद, राम सिंह धौनी, राहुल कुमार, देवदत्त कलौगी, अग्रवाल सभा के महामंत्री अमित गर्ग व बॉलीवुड से जुड़े सीपी ठाकुर प्रमुख हैं। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र भसीन ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने चंपावत विधानसभा उपचुनाव में चुनाव लड़ने से हाथ खड़े कर दिए। इससे साफ है कि कांग्रेस ने अभी से हार मान ली है।
उन्होंने कहा कि इस उपचुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ऐतिहासिक मतों से विजयी होंगे। भसीन ने कहा कि हाल में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस ने अब चंपावत विधानसभा उप चुनाव में अभी से हार मान ली है। विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता बड़े-बड़े दावे कर रहे थे और उनके द्वारा समितियां भी गठित कर दी गई थीं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने इस उपचुनाव से हाथ खड़े कर दिए हैं। साफ है कि कांग्रेस नेताओं को इस चुनाव में भारी पराजय का आभास अभी से हो गया है। यही कारण है कि चंपावत से पिछले चुनाव में प्रत्याशी रहे कांग्रेस नेता सहित अन्य सभी वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव लड़ने से कन्नी काट ली।
कांग्रेस में धामी का खौफ : चौहान
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि चंपावत उपचुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने कांग्रेस दमदार चेहरे को उतारने से कतरा रही थी या उसके बड़े नेताओं ने मैदान में उतरने से मना कर दिया। यह मुख्यमंत्री धामी का खौफ है कि पूर्व विधायक ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। खुद कांग्रेस के उप नेता प्रतिपक्ष ने भी साफ किया कि पूर्व में इस सीट से जो विधायक रहे और चुनाव लड़ते रहे, उन्होंने खुद ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इससे साफ है कि कांग्रेसी नेता डरे और सहमे हुए हैं। कांग्रेस में ही अंदरूनी घमासान है और उसे जन मुद्दों को उठाने की फुर्सत नहीं है।
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