सोनिया गांधी और मायावती को भारत रत्न से अलंकृत करे भारत सरकार: हरीश रावत
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए भारत रत्न की मांग की है।
रावत ने ट्वीट कर कहा कि दोनों ही प्रखर राजनीतिक व्यक्तित्व हैं। उनकी राजनीति से सहमत या असहमत हुआ जा सकता है। रावत ने लिखा कि- इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि सोनिया जी ने भारतीय महिला की सामाजिक गरिमा और सामाजिक समर्पण व जनसेवा के मापदंडों को नई ऊंचाई व गरिमा प्रदान की है।
मायावती जी ने वर्षों से पीड़ित-शोषित लोगों के मन में एक अद्भुत विश्वास का संचार किया है। भारत सरकार को चाहिए कि इस वर्ष इन दोनों को भारत रत्न देकर अलंकृत करे। रावत के इस ट्वीट के सियासी निहितार्थ भी खोजे जा रहे हैं।
आदरणीय #सोनिया_गांधी जी व सम्मानित बहन #मायावती जी, दोनों प्रखर राजनैतिक व्यक्तित्व हैं। आप उनकी राजनीति से सहमत और असहमत हो सकते हैं, मगर इस तथ्य से आप इनकार नहीं कर सकते हैं कि सोनिया जी ने भारतीय महिला की गरिमा और सामाजिक समर्पण व जनसेवा के मापदंडों को एक नई ऊंचाई व pic.twitter.com/FaFfHOf355
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) January 5, 2021
रावत ने भाजपा पर किया वार
नौकरियों के मुद्दे को लेकर मंगलवार को उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत पर पलटवार किया है।
मंगलवार को फेसबुक पर रावत ने पोस्ट किया कि भाजपा कार्यकाल में परीक्षाओं में धांधली नियम बन गया है। वन आरक्षी, पंचायत, पिटकुल आदि में पहले विज्ञप्तियां जारी हुईं और इसके बाद युवा मारे-मारे फिर रहे हैं। विधानसभा और दून नगर निगम में नियुक्तियां हुई हैं और वह किसकी हुई हैं यह सबको पता है।
पूर्व सीएम ने कहा कि सीएम के रूप में उन्हें काम करने के लिए 32 महीने मिले। इसमें भी केदारनाथ आपदा और राजनीतिक आपदा ने समय खाया। फिर भी उस समय की सरकार में प्रति माह एक हजार नौकरियां सरकारी विभागों में सृजित हुईं।
वर्तमान भाजपा सरकार का हाल यह है कि पिछले 46 महीनों से पब्लिक सर्विस कमीशन की तो कोई विज्ञप्ति ही नहीं निकली। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, मेडिकल और उच्च शिक्षा भर्ती बोर्ड आदि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही गठित किए गए थे। रावत ने एक शेर भी पेश किया-इधर-उधर की बात न कर, ये बता कि नौकरियां कहां गईं, मुझे गरज नहीं आंकड़ों से, मेरे लिए तो मेरी नौकरी की बात है।