मुलायम-अखिलेश को समधी- दामाद बनाने पर 'भूचाल'
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उत्तराखंड कांग्रेस में दामाद और समधी जैसे संबोधनों को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है। पार्टी में उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े नेताओं को पिता-पुत्र (मुलायम सिंह-अखिलेश यादव) के आगमन और उनकी रिश्तेदारी रास नहीं आ रही है।
वहीं मुलायम सिंह यादव के उत्तराखंड बनने के खिलाफ हूं संबंधी बयान ने आग में घी का काम किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कहते हैं कि पुरानी बातों पर चर्चा करने का फायदा नहीं है लेकिन उनका कहना है कि यूपी का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब उत्तराखंड का नियोजन ठीक होगा।
साथ ही नसीहत देते हैं कि अगर अभी यूपी को मैनेज करने में विलंब किया तो 3-4 टुकड़े और होने हैं। अब दुबारा उत्तराखंड और यूपी एक तो होंगे नहीं ऐसे में उन्हें ये प्रयास करने चाहिए कि हमारे बीच जो विवाद हैं उनका हल हो जाए तो ज्यादा अच्छा है।
मुलायम सिंह बयान ने जख्मों को किया हरा
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष और दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने यूपी सीएम अखिलेश यादव और पिता मुलायम सिंह यादव के उत्तराखंड के दौरों खासतौर मुलायम सिंह बयान को उत्तराखंडियों के मुजफ्फरनगर कांड के जख्मों को हरा कर देने का प्रतीक बताया है।
मुलायम सिंह को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। मुलायम सिंह ने विवादास्पद बयान देकर साबित कर दिया कि 2 अक्तूबर 1994 को मुजफ्फनगर की घटना पूर्वनियोजित थी।
उनका कहना है, 14 वर्ष की अल्पायु में विकास के नए मानदंड स्थापित किए हैं इसके लिए किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। धीरेंद्र प्रताप ने अखिलेश को उनकी पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा उत्तराखंड का दामाद बताए जाने को शर्मनाक बताया।
उनका कहना है कि राजनैतिक प्रोटोकोल दिए जाने का सदैव पक्षधर हूं लेकिन ‘राज्य के जवांई का खिताब’देने से पहले हमें जनता की कुर्बानियों शहीदों और जनभावना के बारे में सोचना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अखिलेश को राज्य का दामाद (पत्नी डिंपल काशीपुर की हैं) और यूपी के सीएम के नाते बड़े भाई से संबोधित किया था।
हरक सिंह की मौजूदगी बनी चर्चा
मुलायम सिंह देहरादून में जिस परिवार के विवाद समारोह में शामिल होने पहुंचे वहां मंत्री हरक सिंह रावत की मौजूदगी भी चर्चा में रही। दोपहर जिस समय मुलायम डालनवाला स्थित विक्रम सिंह के आवास पर पहुंचे वहां पहले से मंत्री हरक सिंह मौजूद थे।
बताते हैं मुलायम सिंह और हरक सिंह के बीच विभिन्न विषयों पर लंबी चर्चा हुई। खासकर उस समय की जब हरक सिंह यूपी में मंत्री हुआ करते थे। दोनों नेताओं ने साथ भोजन भी किया।
हरक सिंह का कहना है कि वे भी विवाह समारोह में आमंत्रित थे लेकिन सोमवार को मसूरी नहीं पहुंच पाने के कारण वे बुधवार को शगुन देने घर पहुंचे थे।
‘नेताजी’ का मूड बिगड़ा
जौलीग्रांट एयरपोर्ट आने के बाद सपाइयों के भीड़ लगा लेने से पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव का मूड खराब हो गया। यादव ने पार्टीजनों से एक लाइन में खड़े होने के लिए कहा था लेकिन किसी ने न सुनी।
गुस्से में वह नेताओं से बिना मिले सीधे विक्रम सिंह के यहां डालनवाला चले आए। डालनवाला आने की फिर किसी नेता की हिम्मत न पड़ी, सिर्फ विनोद बड़थ्वाल बाद में आए। लौटते वक्त सपा मुखिया एयरपोर्ट पर नेताओं से मिले।