कांग्रेस की इस दमदार महिला नेता ने किया ऐसा काम कि हर जगह लूट रही वाहवाही
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कांग्रेस की यह प्रसिद्ध महिला नेता अपने इस काम की वजह से खूब वाहवाही लूट रही है। इस काम के जरिए वह लोगों के दिलों में तो जगा बना ही रहीं हैं साथ ही ऐसा करके उन्होंने एक तीर से दो निशाने साधे हैं।
प्रदेश की भाजपा सरकार तो काठगोदाम निवासी दिवंगत ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे के परिजनों को मुआवजे की शेष रकम नहीं दे सकी, अलबत्ता नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने अपने निजी प्रयासों से जुटाए गए सात लाख रुपये धरने पर बैठे ट्रांसपोर्टर के परिजनों को सौंपने के बाद उनका धरना खत्म कराकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं।
इससे जनता में उनका कद बढ़ गया है वहीं उन्होंने मुआवजा प्रकरण में सरकार और उसके मंत्रियों को कठघरे में खड़े करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि यदि परिजन मामले को न्यायालय में ले जाते हैं तो वह उनके साथ खड़ी हैं।
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश धनराशि परिजनों को देने की पहल को अमलीजामा पहनाया
बता दें कि डीएम दीपेंद्र चौधरी ने पांडे परिवार को मुआवजे के रूप में दस लाख रुपये का भुगतान 10 फरवरी तक करने का आश्वासन दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुआवजा देने से इनकार करने के बाद यह मामला जिला प्रशासन के गले की फांस बन गया था।
कालाढूंगी के विधायक बंशीधर भगत ने भी सीएम को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की लेकिन सरकार ने उनकी भी एक नहीं सुनी। ऐसे में ट्रांसपोर्टर के परिजनों को धरने पर बैठने के लिए विवश होना पड़ा। धरने के चौथे दिन ट्रांसपोर्टर की पत्नी का स्वास्थ्य बिगड़ा तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए थे।
मौके पर पहुंचे पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कमला पांडे को अस्पताल में भर्ती कराने में भी विफल रहे।इस पूरे मामले में भाजपा सरकार के साथ साथ विधायक बंशीधर भगत और मेयर जोगेंद्र रौतेला की भी किरकिरी हुई और दोनों नेताओं को अपनी ही सरकार में मुंह की खानी पड़ी।
आखिरकार नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा पर वादाखिलाफी के आरोप को तेज करते हुए खुद ही मुआवजे के बराबर धनराशि परिजनों को देने की पहल को अमलीजामा पहनाया। यही नहीं, उन्होंने ट्रांसपोर्टर की पत्नी के लिए निजी क्षेत्र में एक जगह नहीं बल्कि तीन जगह नौकरी की व्यवस्था कर खुद के दमदार होने का भी संदेश दिया।
आईएसबीटी और निकाय सीमा विस्तार को लेकर भी सरकार को घेरा
उन्होंने आईएसबीटी और निकाय सीमा विस्तार को लेकर भी सरकार को घेरा। कहा भाजपा सरकार ने लोगों को विश्वास में लिए बगैर असंवैधानिक रूप से सीमा विस्तार किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों मामलों में अब सरकार को न्यायालय में जवाब देते नहीं बनेगा।
ट्रांसपोर्टर पांडे के परिजनों की आर्थिक मदद कर इंदिरा ने न केवल खूब वाहवाही बटोरी बल्कि अब वह इस पूरे मामले को न्यायालय में मजबूती के साथ रखने के लिए भी पांडे परिवार के साथ खड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इस मामले में कानूनी राय लेकर परिजनों की ओर से वाद दायर कराया जाएगा और न्यायालय के समक्ष डीएम द्वारा सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन की फुटेज और विधायक बंशीधर भगत की चिट्ठी को बतौर सबूत पेश किया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष को उम्मीद है कि न्यायालय से जरूर इस मामले में ट्रांसपोर्टर के परिवार को न्याय मिलेगा।