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इस पर ध्यान न दिया तो होगा अशुभ
देहरादून/ब्यूरो
Updated Mon, 12 Aug 2013 09:33 AM IST
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इस बार रक्षाबंधन पर्व को लेकर लोगों में काफी असमंजस बना हुआ है। कोई 20 तो कोई 21 अगस्त को इसे मनाने की तैयारी में है। ज्योतिषियों की मानें तो यह त्योहार 21 अगस्त को मनाना ही सही है। धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार रक्षाबंधन पूर्णिमा की उदयकालीन तिथि में मनाया जाना ही शास्त्र सम्मत है।
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20 अगस्त को सुबह 10:12 बजे से पूर्णिमा की शुरुआत होगी, जो 21 को सुबह 07:05 बजे तक रहेगी। इस दिन भद्रा सुबह 10:12 बजे से शाम 08:38 बजे तक रहेगी। यानी 10 घंटे 26 मिनट तक भद्रा रहेगी। भद्राकाल में त्योहार मनाना अशुभ माना जाता है। साथ ही सूर्योदय के समय पूर्णिमा के होने पर ही यह पर्व मनाया जाता है। रात्रि में पर्व मनाना निषेध माना जाता है। ऐसे में यह पर्व 21 अगस्त को सुबह से शाम तक मनाया जा सकता है।
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ये है मान्यता
राजा बलि को श्रावण पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी जी ने राखी बांधी थी। भगवान श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लगने पर द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर बांधी थी। देवासुर संग्राम में इंद्र की पराजय हुई तो उस समय देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधा था, जिसके प्रभाव से इंद्र की विजय हुई। शुभ संकल्प और रक्षा की याद ताजा करने का दिन है रक्षाबंधन।
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21 अगस्त को श्रावणी उपाकर्म करना शुभ रहेगा। रक्षाबंधन के दिन एक रेशमी वस्त्र में केसर, सरसों, चंदन, चावल, दूर्बा रखकर रंगीन सूत की डोरी से बांधकर उसका पूजन करने के पश्चात दाहिने हाथ में बांधने से वर्षभर सुख-समृद्धि रहती है। 21 अगस्त को सूर्योदय के साथ ही पूर्णिमा का मिलन है। इसी दिन त्योहार मनाना उचित होगा।
- आचार्य भरत राम तिवारी, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड विद्वत सभा
21 अगस्त को उदयकालीन पूर्णिमा है। इस दिन सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक पूर्णिमा रहेगी। ऐसे में 7 बजकर 5 मिनट तक बहनें अपनी राखी पूज कर रख लें। फिर उसे पूरे दिन किसी भी समय भाई की कलाई पर बांधा जा सकता है। रक्षाबंधन का त्योहार भद्रा होने के साथ ही रात्रि में मनाना शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता है।
- आचार्य हेमंतमणि शरण शास्त्री
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