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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 : देश-विदेश में आवाज का जादू बिखेर रही शिकायना

Thu, 05 Mar 2020 03:30 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Thu, 05 Mar 2020 03:30 PM IST
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Shikayana mukhiya spreading the magic of voice in India and abroad
शिकायना मुखिया

महज 14 साल की उम्र में शिकायना मुखिया सिंगिंग के क्षेत्र में खास मुकाम पा चुकी हैं। भले ही देश के सबसे लोकप्रिय सिंगिंग शो द वॉइस इंडिया और सुपर स्टार सिंगर का खिताब जीतने से शिकायना एक कदम से चूक गई हों, लेकिन वह अपनी आवाज से सबका दिल जीतने में कामयाब रही। सामान्य परिवार की शिकायना आज बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

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डालनवाला निवासी शिकायना के पिता विकास मुखिया व मां दीरा मुखिया कर्नल ब्राउन स्कूल में टीचर हैं। सात वर्ष की उम्र में शिकायना ने सिंगिंग शुरू की। सीमित संसाधन होने के कारण बड़े सिंगिंग इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग लेना संभव नहीं हो सका तो पिता ने ही शिकायना को संगीत की बारीकियां सिखाईं।
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सिंगिंग में शिकायना का सफर

वर्ष 2018 में शिकायना मुखिया ने ‘द वॉइस इंडिया’ शो में प्रतिभाग किया। शो में शिकायना की आवाज को खासा सराहा गया। शिकायना फाइनलिस्ट रही, लेकिन बहुत कम वोटों के अंतर से खिताब जीतने से रह गईं। इसके बाद शिकायना को देश की कई बड़ी म्यूजिक कंपनियों से ऑफर आने शुरू हुए।

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ब्वॉयज स्कूल की एकमात्र छात्रा है शिकायना

 

2019 अंत में सोनी चैनल पर प्रसारित सिंगिंग शो सुपर स्टार सिंगर में भी शिकायना ने हिस्सा लिया और टॉप-7 में जगह बनाई। दो महीने पहले जर्मनी की एक बड़ी म्यूजिक कंपनी ने शिकायना के साथ एलबम रिकॉर्ड की है, जो अब जल्द रिलीज होगी।

शिकायना के साथ एक ही रोचक कहानी जुड़ी हुई है। शिकायना कर्नल ब्राउन स्कूल, डालनवाला में कक्षा सात में पढ़ रही हैं। यह ब्वॉयज स्कूल है। स्कूल में ब्वॉयज के साथ पढ़ने वाली शिकायना एकमात्र छात्रा है। दरअसल, जब शिकायना वर्ष 2018 में द वॉइस इंडिया में परफॉर्म कर रही थी, उस समय वह दूसरे स्कूल में पढ़ रही थी। शो के कारण उनकी अटेन्डेंस बहुत कम दर्ज हुई।

इस वजह से स्कूल प्रबंध ने परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद शिकायना के पिता और मां ने कर्नल ब्राउन स्कूल के प्रबंधन से उसे एडमिशन देने की गुजारिश की तो उसकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें स्कूल में एडमिशन दे दिया गया। कर्नल ब्राउन स्कूल 1926 में स्थापित हुआ। यह शहर का सबसे पुराना रेजिडेंशियल स्कूल माना जाता है।

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