ट्रांसपोर्टर प्रकाश के परिजनों को मिलेगा 12 लाख का मुआवजा, पत्नी को संविदा में नौकरी
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देहरादून में मंत्री सुबोध उनियाल के जनता दरबार कार्यक्रम में जहर खाकर जान गंवाने वाले ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे के परिजनों को प्रशासन 12 लाख रुपये देगा और पत्नी को संविदा पर नौकरी मिलेगी। बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी प्रशासन उठाएगा।
यह एलान डीएम ने परिजनों की उस धमकी के बाद किया जिसमें उन्होंने अंतिम संस्कार न करने और जाम लगाने की बात कही थी। शव काठगोदाम स्थित घर पर आया तो परिजनों ने 50 लाख रुपये और सरकारी नौकरी की मांग रख दी थी।
पांच घंटे की माथापच्ची के बाद डीएम ने मुख्य सचिव से बातचीत की। उनके आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार को तैयार हुए। मुआवजा और सरकारी नौकरी को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से अभी इन बिंदुओं पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। संभव है कि स्थानीय स्तर से कोई घोषणा की गई हो।
प्रकाश पांडे का शव नई बस्ती काठगोदाम स्थित घर पर मंगलवार रात दो बजकर 35 मिनट पर पहुंचा। माता-पिता, पत्नी, भाई और बच्चे उससे लिपट कर रोने लगे। बुधवार सुबह सात बजे से घर के बाहर भीड़ बढ़ने लगी।
मांग पूरी न करने पर दी आंदोलन की चेतावनी
इस बीच प्रकाश पांडे के बहनोई और अन्य करीबियों ने पुलिस प्रशासन को बताया कि जब तक प्रकाश की पत्नी को सरकारी नौकरी, 50 लाख रुपये आर्थिक मदद, बुजुर्ग माता-पिता को मेडिकल सुविधा नहीं दी जाती और बच्चों की पढ़ाई का खर्च सरकार वहन करने का वादा नहीं करती तब तक अंतिम संस्कार नहीं होगा।
जानकारी मिलने पर डीएम दीपेंद्र चौधरी और एसएसपी जन्मेजय खंडूरी 8.30 बजे वहां पहुंचे। मेयर डॉ. जोगेंद्र सिंह रौतेला पहले ही पहुंचे हुए थे। परिजनों के बुलाने पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश भी आ गईं।
इसके बाद बंद कमरे में दोनों अधिकारियों की नेता प्रतिपक्ष डॉ. हृदयेश और मेयर से वार्ता हुई। इस बीच प्रकाश के बहनोई उमेश मेलकानी ने चेतावनी दी कि अब सब्र जवाब दे रहा है। प्रदेश सरकार से सहायता नहीं मिली तो लोग शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करेेंगे।
मेयर ने परिजनों को मांगें पूरी करने के लिए आधे घंटे का समय मांगा। 11 बजे डीएम ने वहां पहुंचकर मदद का एलान किया। इस बीच नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि आश्वासन पूरा नहीं हुआ तो जिलाधिकारी चैन से नहीं रह पाएंगे। वह परिवार के साथ खड़ी रहेंगी।