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कंपनी का कहना, अब दून में काम नहीं करना
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 20 Dec 2013 09:29 PM IST
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तमाम सियासत और हाई वोल्टेज ड्रामों के बाद अब डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली कंपनी ने नया बम फोड़ दिया है। डीवीडब्ल्यूएम कंपनी ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का काम वापस देने का इरादा जताते हुए एक माह का नोटिस निगम प्रशासन को दिया है।
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पिछले कई माह से निगम और कंपनी के बीच विवाद चल रहा है। शहरी विकास मंत्री और प्रमुख सचिव नगर के हस्तक्षेप के बाद भी सुलह तो हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में फिर से ‘रार’ शुरू हो गई। अब शुक्रवार को कंपनी ने निगम को नोटिस दिया है।
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नोटिस में कहा गया है कि कंपनी घाटे में है। इसलिए वह अब काम नहीं कर सकती। एक माह में अगर सेलाकुई में रिसाइकिलिंग प्लांट व शास्त्रीनगर में प्रस्तावित वेस्ट ट्रांसफर ग्राउंड न बना तो कंपनी एमओयू निरस्त कर देगी।
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कंपनी के सीईओ सिद्वार्थ जैन ने बताया कंपनी भारी घाटे में है। एमओयू के तहत डोर-टू-डोर कूड़ा उठाकर कंपनी को उसे रिसाइकिंलिग प्लांट में रिसाइकल करना था। उससे कंपनी को फायदा था। लेकिन निगम ने तीन साल बीत जाने के बाद भी रिसाइकिलिंग प्लांट नहीं बनाया। ऐसे में काम छोड़ना अब मजबूरी होगा।
सियासत और अहम से पूरा प्रोजेक्ट फुस
निगम में ‘सियासत’ और ‘अहम’ के कॉकटेल ने केंद्र सरकार के डोर-टू-डोर कूड़ा उठान प्रोजेक्ट को फुस कर दिया है। कभी कंपनी को देने वाले वेतन का झगड़ा, तो कभी वाहनों की मरम्मत का झगड़ा। रोज की समस्याओं के चलते आखिरकार कंपनी ने काम समेटने का फैसला कर ही लिया।
वहीं पर्यावरण मंत्रालय की क्लीन चिट के बावजूद निगम ने शिशमबाड़ा (सेलाकुई) में कूड़ा निस्तारण प्लांट का कार्य शुरू नहीं किया।
क्या था प्रोजेक्ट
दून वैली वेस्ट मैनेजमेंट का प्रोजेक्ट दून में दो फेज में होना था। पहले फेज में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाना था। जबकि दूसरे फेज में उठाए गए कूड़े के निस्तारण के लिए सेलाकुई में करोड़ों रुपए की लागत से निस्तारण प्लांट का निर्माण होना था।
इसी के साथ शास्त्रीनगर में एक कूड़ा ट्रांसफर ग्राउंड का भी निर्माण होना था। लेकिन पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की रोक और बाद में निगम की सुस्ती ने पूरे प्रोजेक्ट पर ग्रहण लगा दिया।
कंपनी का दावा, बहुत हुआ शोषण
कंपनी का दावा है कि निगम ने एमओयू का बिल्कुल भी पालन नहीं किया। कभी उनके वाहन घटा दिए तो कभी वेतन रोका दिया। वेतन न मिलने से कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। हड़ताल होने से शहर में कूड़ा उठाना प्रभावित हुआ।
क्या कहते हैं अधिकारी
कंपनी चाहे तो कल से ही काम बंद कर सकती है। कोई एमओयू का उल्लघन नहीं हुआ है। कंपनी को निगम ने भी डोर-टू-डोर कूड़ा उठान के लिए वाहन उपलब्ध कराए है। ट्रंचिंग ग्राउंड भी निगम का है। वेतन भी निगम दे रहा है। तो कंपनी को घाटा कैसे हो रहा है। जो वाहन खराब है, उसके लिए भी आरटीओ को परिक्षण के लिए लिख दिया गया है। वह भी कंपनी को मिलने वाले हैं।
-मुख्य नगर अधिकारी, अशोक कुमार
निगम बार बार एमओयू का उल्लंघन कर रहा है। यहां पर राजनीति हो रही है। ऐसे में कार्य करना संभव नहीं है।
-सीईओ, डीवीडब्ल्यूएम कंपनी, सिद्वार्थ जैन