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Dehradun News: मांंग कम होने की वजह दवाओं का नया बैच नहीं बनातीं कंपनियां
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Iदून अस्पताल की ओर से निजी कंपनियों को एक महीने की ही भेजी जाती है मांग
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Iअस्पताल प्रबंधन ने माना एमआरपी लिखी दवाएं लेना मजबूरी
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Iराजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में जिन दवाओं की आपूर्ति निजी कंपनियों की ओर से की जा रही है, उनमें अधिकतर दवाओं में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) दर्ज होकर आ रही है। कंपनियां अस्पताल से पर्याप्त ऑर्डर न मिलने की वजह से नया बैच प्रिंट करने से इन्कार कर रही हैं।I
Iजानकारी के मुताबिक दून अस्पताल में करीब 40 प्रकार की टैबलेट और आईवी फ्लूड निजी कंपनियों की ओर से सप्लाई किया जाता है। इनमें से अधिकतर दवाओं पर एमआरपी दर्ज होकर आ रही है। अस्पताल के फार्मेसी विभाग के अधिकारियों की ओर से पूर्व में ही दवाओं से एमआरपी हटाने की बात कही गई थी। लेकिन कंपनियों ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा था कि अस्पताल एक साथ सिर्फ एक महीने से लेकर 45 दिनों की ही दवाओं का ऑर्डर देता है, ऐसे में इतनी कम दवाओं के लिए नए बैच छापना उनके लिए संभव नहीं है।
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Iअस्पताल प्रबंधन के कहने पर फार्मेसी विभाग के अधिकारियों की ओर से दवा कंपनियों को शनिवार को फिर से मेल किया गया तो उनकी ओर से आपत्ति जाहिर की जा रही है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि दवाओं में एमआरपी लिखे होने का मामला संज्ञान में आया है। इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं मिली है। इसमें व्याहारिक दिक्कतें आ रही हैं। जिनको दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।I
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Iअस्पताल प्रबंधन ने माना एमआरपी लिखी दवाएं लेना मजबूरी
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Iराजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में जिन दवाओं की आपूर्ति निजी कंपनियों की ओर से की जा रही है, उनमें अधिकतर दवाओं में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) दर्ज होकर आ रही है। कंपनियां अस्पताल से पर्याप्त ऑर्डर न मिलने की वजह से नया बैच प्रिंट करने से इन्कार कर रही हैं।I
Iजानकारी के मुताबिक दून अस्पताल में करीब 40 प्रकार की टैबलेट और आईवी फ्लूड निजी कंपनियों की ओर से सप्लाई किया जाता है। इनमें से अधिकतर दवाओं पर एमआरपी दर्ज होकर आ रही है। अस्पताल के फार्मेसी विभाग के अधिकारियों की ओर से पूर्व में ही दवाओं से एमआरपी हटाने की बात कही गई थी। लेकिन कंपनियों ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा था कि अस्पताल एक साथ सिर्फ एक महीने से लेकर 45 दिनों की ही दवाओं का ऑर्डर देता है, ऐसे में इतनी कम दवाओं के लिए नए बैच छापना उनके लिए संभव नहीं है।
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Iअस्पताल प्रबंधन के कहने पर फार्मेसी विभाग के अधिकारियों की ओर से दवा कंपनियों को शनिवार को फिर से मेल किया गया तो उनकी ओर से आपत्ति जाहिर की जा रही है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि दवाओं में एमआरपी लिखे होने का मामला संज्ञान में आया है। इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं मिली है। इसमें व्याहारिक दिक्कतें आ रही हैं। जिनको दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।I
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